लटकाइयेगा, झटकाइयेगा लेकिन बच के कहां जाईयेगा! सुप्रीम कोर्ट से सीएम हेमंत की याचिका खारिज होने पर पूर्व सीएम बाबूलाल का तंज

    लटकाइयेगा, झटकाइयेगा लेकिन बच के कहां जाईयेगा! सुप्रीम कोर्ट से सीएम हेमंत की याचिका खारिज होने पर पूर्व सीएम बाबूलाल का तंज

    Ranchi- कथित जमीन घोटले में ईडी के समन के खिलाफ सुप्रीम से सीएम हेमंत की याचिका खारिज होने के बाद पूर्व सीएम बाबूलाल एक बार फिर से अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तंज कसते हुए लिखा है कि “ED के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सोरेन की याचिका वापस लेने के अनुरोध के साथ ख़ारिज कर दी गई.  सुप्रीम कोर्ट ने ये भी मानने से इंकार कर दिया कि ED किसी बदनीयत से काम कर रही है.  हेमंत सोरेन जी, ये जांच के डर से बचने के लिये मंहगे वकीलों के दम पर मामले को और कितने दिन लटकाइयेगा, झटकाइयेगा? बेहतर होगा कि हिम्म्त जुटाकर जांच का सामना करिए। अगर ग़लत नहीं हैं तो कोई क्या कर लेगा? और अगर ग़लत किये हैं तो फिर आपको जेल जाने से कौन बचा सकता है?  याद रहे,  भारत देश का क़ानून इतना सशक्त है कि हर किसी को देर-सबेर उसके किये की सजा मिलनी ही है, चाहे वह कितना ही पहुंच, प्रभाव और ताक़त वाला क्यों न हो.

     

    सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में अपील करने की दी है सलाहं

    ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने सीएम हेमंत को ईडी समन के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करने की सलाह दी है, सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद सीएम हेमंत ने अपनी याचिका वापस ले लिया. इधर ईडी ने इस मामले में चौथा समन जारी करते हुए सीएम हेमंत को 23 सितम्बर को अपने  क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है.

    माना जा रहा है कि 23 सितम्बर के पहले सीएम हेमंत इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ईडी के समन पर रोक लगाने का आग्रह कर सकते हैं. क्योंकि यदि उनके द्वारा इस मामले में हाईकोर्ट मे अपील दायर नहीं किया जाता है तो उनके सामने ईडी के समक्ष पेश होने के सिवा कोई विकल्प नहीं रहेगा.

    ध्यान रहे कि कथित जमीन घोटला मामले में ईडी ने सीएम हेमंत को 14 अगस्त को अपने कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया था, समन जारी होने के बाद सीएम हेमंत ने ईडी को एक पत्र भेजकर यह सवाल खड़ा किया था कि क्या किसी भी राज्य के मुखिया को 14 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलावा भेजना उसे अपमानित करने की साजिश नहीं है? हर किसी को पत्ता है कि 15 अगस्त और 15 अगस्त के पहले किसी भी सीएम की कितनी व्यस्तता होती है, बावजूद  इसके जानबूझ 14 अगस्त की तिथि को निर्धारित करना, इस बात का प्रमाण है कि अपने राजनीतिक आका के दवाब में ईडी एक निर्वाचित सरकार के मुखिया को बदनाम करने की साजिश रच रही है, ताकि इस मामले को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मीडिया का हेडलाईन बनाया जा सके. इसके साथ ही सीएम हेमंत ने ईडी को अपना समन वापस लेने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा था.

    हालांकि उसके बाद एक बार फिर से 24 अगस्त को ईडी कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया, लेकिन सीएम हेमंत उस दिन भी ईडी कार्यालय नहीं पहुंचे और ईडी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयें, इधर मामला कोर्ट में रहने के बावजूद ईडी ने सीएम हेमंत के नाम 9 सितम्बर को तीसरा समन भेजा दिया, लेकिन सीएम हेमंत उस दिन भी ईडी कार्यालय नहीं पहुंचे. साफ है कि सीएम हेमंत अब इस मामले का समाधान सुप्रीम कोर्ट में चाहते हैं.

    पीएमएलए-2002 की धारा 50 और 63 की वैधता की चुनौती दे चुके हैं सीएम हेमंत 

    यहां बता दें कि सीएम हेमंत ने अपनी याचिका में पीएमएलए-2002 की धारा 50 और 63 की वैधता को चुनौती दी है, उन्होंने कहा कि पीएमएलए की धारा-19 के तहत जांच एजेंसी को धारा 50 के तहत बयान दर्ज करने के दौरान ही किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार है. जबकि आईपीसी के तहत किसी भी जांच एजेंसी के समक्ष दिया गया बयान का कोर्ट में कोई मान्यता नहीं है,  इस विरोधाभास को दूर करने की जरुरत है. उन्होंने ने इस मामले में ईडी के साथ ही न्याय एवं कानून मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया है. हालांकि इस बीच खुद ईडी भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है, और उसके द्वारा किसी भी नतीजे पर पहुंचने के पहले ईडी का पक्ष सुनने की गुहार लगायी गयी है. यहां यह बता दें कि यह मामला कार्ति पी चिदंबरम बनाम ईडी पर आधारित है, और वह मामला भी अभी कोर्ट में पेंडिंग है. 


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