वीआईपी ट्रेनों के लिए सुरक्षा कवच और आम लोगों से जुड़े ट्रेनों की उपेक्षा, देखिये बालासोर ट्रेन हादसे के बाद मोदी सरकार पर कैसे बरसे पप्पू यादव  

    वीआईपी ट्रेनों के लिए सुरक्षा कवच और आम लोगों से जुड़े ट्रेनों की उपेक्षा, देखिये बालासोर ट्रेन हादसे के बाद मोदी सरकार पर कैसे बरसे पप्पू यादव  

    Panta- बालासोर रेल दुर्घटना के बाद पूरे देश में एक बार फिर से एंटी कोलिजन डिवाइस पर बहस की शुरुआत हो चुकी है. विपक्ष का दावा है कि यदि इस ट्रेन में भी एंटी कोलिजन डिवाइस लगा होता तो लोगों की जिंदगी बच सकती थी. लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार चुन चुन कर सिर्फ वीआईपी ट्रेनों में ही यह सुविधा प्रदान कर रही है, और आम लोगों से जुड़े ट्रेनों की उपेक्षा की जा रही है. आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा को हाशिये पर ढकेल दिया गया है, यह रेल हादसा भी मोदी सरकार के उस गलत नीतियों का ही दुस्परिणाम है.

     ट्रेनों में सुरक्षा कवच का क्या हुआ?   

    इसी कड़ी में मोदी सरकार की नीतियों की आलोचला करते हुए जनाधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने कहा है कि वीआईपी ट्रेनों के लिए सुरक्षा कवच, आम लोगों से जुड़े ट्रेनों की उपेक्षा क्यों? रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सवाल पूछते हुए पप्पू यादव ने कहा कि ट्रेनों में सुरक्षा कवच का क्या हुआ?  क्या सिर्फ लग्जरी ट्रेनों में सुरक्षा कवच लगाया जाएगा?  क्या सिर्फ वीआईपी ट्रेनों के लिए सुरक्षा कवच होगा? आम आदमी जिस ट्रेन में सफर करेगा उसमें सुरक्षा कवच नहीं होगा?

    बच सकती थी सैकड़ों लोगों की जिंदगी

    उन्होंने कहा कि यदि एंटी कोलिजन डिवाइस लगवाया गया होता तो सैंकड़ों लोगों की जिदंगी बच सकती थी, लेकिन मोदी सरकार ने रेलवे के लिए अलग से बजट के पेश करने की पंरपरा को ही बंद कर दिया, जिसके कारण रेलवे को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

    बालासोर दुर्घटना के बाद पक्ष विपक्ष का जुबानी वार तेज

    ध्यान रहे कि बालासोर ट्रेन हादसे के बाद पक्ष विपक्ष की घेराबंदी जारी है, जहां विपक्ष एक स्वर से रेल मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा यूपीए सरकार के दौरान हुए रेल दुर्घटनाओँ को सामने रख कर विपक्ष की इस मांग को खारिज कर रहा है. उसका दावा है कि यूपीए सरकार के दौरान भी कई रेल दुर्घटनाएं हुई थी, लेकिन तब तो रेल मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ था. भाजपा ने इस्तीफे की मांग को सस्ती राजनीति का हिस्सा बताया है, लेकिन विपक्ष की ओर से पूर्व रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री और नीतीश कुमार का उदाहरण भी पेश किया जा रहा है, जिनके द्वारा अपने कार्यकाल में हुए हादसे के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया गया था.


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