राहुल गांधी की सदस्यता बहाली पर नीतीश की चुप्पी, महागठबंधन की एकजुटता पर संशय की दीवार

    राहुल गांधी की सदस्यता बहाली पर नीतीश की चुप्पी, महागठबंधन की एकजुटता पर संशय की दीवार

    TNP DESK- राहुल गांधी की सदस्यता बहाली पर सोशल मीडिया में बधाईयों की बरसात लगी हुई है, लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान का खुलना बता रहे हैं. लेकिन विपक्षी एकजुटता का सूत्रधार नीतीश कुमार का इस फैसले पर चुप्पी से कई सवाल खड़े हो गये हैं, उनके अगले सियासी कदम को लेकर आकलनों का दौर शुरु हो चुका है.

    क्योंकि कल तक जदयू के द्वारा यूपी के फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की बात कही जा रही थी, उनके मंत्री श्रवण कुमार इस बात का दावा कर रहे थें कि नीतीश कुमार यूपी से चुनाव लड़कर इस बात को साबित करेंगे कि यूपी का किला भी भाजपा के लिए अभेद नहीं है, और नीतीश कुमार अपने सामाजिक समीकरण के बदौलत इस अभेद माने जाते रहे किले को ध्वस्त करने की कुब्बत रखते हैं.

    नीतीश की नजर पीएम की कुर्सी पर

    इन सारे बयानों से साफ है कि नीतीश कुमार की नजर पीएम की कुर्सी पर है, हालांकि यह सत्य है कि  नीतीश कुमार बार बार इस तरह की खबरों को महज अफवाह बताते रहे हैं, उनका दावा रहा है कि उनकी कोशिश महज विपक्षी दलों को एक करने की है, ना तो वह पीए पद के उम्मीदवार हैं, और ना ही इंडिया का संयोजक बनाये जाने में उनकी कोई विशेष रुचि है. लेकिन राहुल गांधी का सदस्यता बहाली पर नीतीश की चुप्पी से सवाल खड़े होने शुरु हो गये हैं.

    तेजस्वी ने किया फैसले का स्वागत

    यहां याद रहे कि सदस्यता बहाली के तुरंत बाद तेजस्वी यादव की ओर से फैसले का स्वागत करते हुए, सत्यमेव जयते लिखा गया, तेजस्वी यादव ने लिखा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का राहुल गांधी जी के संदर्भ में लिया गया फैसला स्वागत योग्य है। अगर भाजपा के दुष्प्रचारी एवं कॉम्प्रोमाइज्ड तंत्र को ये झटका नही लगता तो कई और विपक्षी नेताओं को ये साजिशों व षड्यंत्रों के तहत विधायिका से बाहर रखने की जालसाजी जारी रखते। सत्यमेव जयते!  

    संभावित चुनौतियों का आकलन में जुटे नीतीश

    लेकिन नीतीश कुमार के ट्वीटर अकाउंट से इस प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी. कम से कम इस फैसले के लिए न्यायालय को धन्यवाद तो दिया ही जा सकता था, जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार एक मंजे हुए राजनेता है, वह कोई भी बयान समय के पहले नहीं देते हैं. निश्चित रुप से उनके द्वारा इस फैसले का उनके सामने आने वाले संभावित चुनौतियों का आकलन किया जा रहा होगा.


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