मन की बात से मणिपुर गायब, तीन महीने की नस्लीय हिंसा पर चुप्पी बरकरार

    मन की बात से मणिपुर गायब, तीन महीने की नस्लीय हिंसा पर चुप्पी बरकरार

    TNPDESK- आज पूरे देश की निगाहें पीएम मोदी की ओर थी, देश के एक बड़े हिस्से और सामाजिक समूहों में इस बात की आस लगी थी कि शायद आज पीएम मोदी नस्लीय हिंसा की चपेट में आने वालों मणिपुर के पीड़ितों को लेकर अपने संबोधन में दो शब्द कहेंगे, हिंसा पीड़ितों को इस बात का विश्वास दिलवायेंगे कि सत्ता निर्मित इस आपदा की घड़ी में पूरा देश आपके साथ खड़ा है, जो हुआ सो हुआ, लेकिन अब हम आपके दिलों पर मरहम लगाने का काम करेंगे. उन आदिवासी बेटियों को इस बात का भरोसा दिलवायेंगे की आपकी अस्मिता और आबरु को तार-तार करने वाले गुनाहगारों को बख्शा नहीं जायेगा. अपराधी चाहे जो हो, वर्तमान सत्ता के साथ उसकी चाहे जितनी नजदीकियां और परोक्ष- अपरोक्ष समर्थन हो, लेकिन उसे उसके कुकृत्य की सजा मिलेगी, आदिवासी समाज को इस बात का विश्वास दिलाया जायेगा कि मणिपुर की घटना एक शर्मनाक अपवाद है, लेकिन हम और हमारा संविधान आदिवासी-दलितों और महिलाओं के साथ खड़ा है, और हम दल और विचारधारा से निरपेक्ष होकर आपके हितों की हिफाजत करेंगे.

    तीन महीनों से जारी नस्लीय हिंसा पर एक शब्द भी नहीं

    लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, तीन महीनों से जारी इस नस्लीय हिंसा पर एक शब्द भी नहीं बोला गया. इसके बजाय प्रधानमंत्री मुस्लिम महिलाओं के साथ संवाद कायम करने की कोशिश करते दिखें. मानसून और जलसंरक्षण पर अपने विचार रखते रहें. प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता प्रकट की गई. लेकिन इस मानव और सत्ता निर्मित आपदा पर गहन चुप्पी साध ली गयी.

     प्राकृतिक आपदा पर चिंता लेकिन सत्ता निर्मित आपदा पर चुप्पी

    हालांकि पीएम मोदी ने इस बात का भरोसा दिलाया कि सर्वजन हिताय ही भारत की भावना और ताकत है. लेकिन यह प्रश्न गौन रह गया कि इस सर्वजन में हमारे आदिवासी दलित हैं या नहीं, इस सर्वजन में मणिपुर आता है या नहीं, वह बेटियां जिनका नग्न परेड करवाया गया, इस सर्वजन का हिस्सा हैं या नहीं, उनका कल्याण और उनकी अस्मिता और आबरु की रक्षा करना सर्वजन हिताय का एजेंडा है या नहीं.

    इस बीच विपक्षी दलों का गठबंधन इंडिया की ओर से हिंसा पीड़ित मणिपुर गये 21 सांसदों ने राजपाल अनुसुइया उइके से मिलकर तत्काल जरुरी कदम उठाने का अनुरोध किया है. टीम ने कहा है कि मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुप्पी विस्मयकारी है. यह पहली बार हो रहा है कि तीन महीनों से किसी राज्य में नस्लीय हिंसा हो रही हो, सैंकड़ों लोगों को अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी हो, हजारों लोगों को घर-द्वार छोड़ राहत कैंपों में शरण लेना पड़ा हो, दर्जनों महिलाओं के साथ बलात्कार और सार्वजनिक बलात्कार की वारदात हुई हो, और देश का प्रधानमंत्री इस पर चुप्पी साधे बैठा रहे. इसके पहले टीम इंडिया की ओर से मणिपुर के सभी पक्षों और सामाजिक समूहों से बात की गयी, राहत कैंपों का दौरा कर उनके हालत और दुख दर्द को समझने की कोशिश की गई.

    राज्यपाल के नाम पत्र में क्या है

    राज्यपाल को लिखे अपने पत्र  में टीम इंडिया ने लिखा है कि हमने चुराचांदपुर, मोइरांग और इंफाल के रिलीफ कैंपों का दौरा किया. उनकी आपबीती सुनी, यह सब कुछ हैरान करने वाला है, राज्य और केन्द्र की सरकार पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह असफल रही है, रिलीफ कैंपों की हालत बद से बदतर है, इंटरनेट पर पाबंदी लगातर निराधार अफवाहों को बढ़ावा दिया जा रहा है. जबकि जरुरत लोगों तक सही सूचना पहुंचाने की है, ताकि अफवाहों को बल नहीं मिले.

    उस लड़की की मां से मुलाकात, जिसे किया गया था निर्वस्त्र

    टीम इंडिया के सांसदों उस लड़की की मां से भी मुलाकात किया, जिसे निर्वस्त्र कर घुमाया गया था. इस मुलाकात के दौरान पीड़िता की मां अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी और अपने पति और बेटे के शव को देखने की गुहार लगाती रही. इस बीच कुकी नेता और भाजपा विधायक पाओलीनलाल हाओकिप ने टीम इंडिया से मिलकर मणिपुर को तीन अलग-अलग केन्द्र शासित राज्यों में बांटने का सुझाव दिया. हालांकि मणिपुर सरकार इस प्रस्ताव को मानने को तैयार नहीं है.


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