"उसे ही समझ बैठा अपना चेहरा, ओढ़ा था जिसे जमाने के लिए", देखिये सीएम हेमंत की मुस्कराहटों पर बाबूलाल का तंज

    "उसे ही समझ बैठा अपना चेहरा, ओढ़ा था जिसे जमाने के लिए", देखिये सीएम हेमंत की मुस्कराहटों पर बाबूलाल का तंज

    Ranchi- सीएम बनने के सपने को सामने खड़ा देख कुतुबमीनार से कूदने के अपने वादे को जमींदोज कर भाजपाई रथ पर सवार होने वाले पूर्व सीएम बाबूलाल का सीएम हेमंत को निशाने पर लेना कोई नयी बात नहीं है. यह राजनीति का आम दस्तूर है कि हर राजनेता अपने विरोधियों की गतिविधियों और उसके कामों पर सवाल खड़ा करता है, टिप्पणियां करता है, ताकि वह जनता के बीच नहीं तो कम से कम अखबारों की सुर्खियों में तो बना रहे, आलाकमान को भी यह एहसास होता रहे कि बंदा कुछ ना कुछ तो कर रहा है, राजनीति में उसकी पूछ अभी खत्म नहीं हुई है.

    सीएम हेमंत की मुस्कराहट से नफरत के पीछे की बेचैनी

    लेकिन नयी बात यह है कि राजनीतिक टिप्पणियों के साथ ही अब बाबूलाल मरांडी को सीएम हेमंत के मुस्काराते चेहरे से भी नफरत होने लगी है, शायद यह झारखंड की राजनीति का पहला वाकया है, जब किसी राजनेता ने अपने प्रतिद्वंद्वी की मुस्काराट पर सवाल उठाये हों. उसकी मुस्कराहटों को उसके राजनीतिक पतन का संकेत माना हो.

    अब पूरी राजनीति ट्विटर पर ही करते नजर आ रहे हैं बाबूलाल

    दरअसल राजनीति के बजाय सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव रहने वाले पूर्व सीएम बाबूलाल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर सीएम हेमंत के मुस्कराहटों पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि “लोग कहते हैं कि हेमंत सोरेन जी अपने ऊपर लगे आरोपों को सुनकर चुप हो जाते हैं. मुस्कुराते हैं. लेकिन, कुछ बोलते नहीं.  लेकिन मैं सोचता हूँ कि वो बोलेंगे भी तो क्या? उनका पारिवारिक मित्र अमित जेल में है, उनका प्रतिनिधि और संताल का सुपर सीएम पंकज जेल में है, उनका एक शागिर्द ( महादलाल ) प्रेम जेल में है, अभी कइयों राजदार ईडी के रडार पर हैं, जो जेल जाने की अपनी बारी के इंतज़ार में हॉंफ रहे हैं. असल में मुख्यमंत्री जी घबराए हुए हैं. अंदर से बहुत बेचैन हैं. असली चेहरा दुनिया के सामने आ जाने एवं बेहिसाब ज़मीन-जायदाद की पोल-पट्टी खुल जाने के चलते जेल जाने के डर से होश-हवास खो बैठे हैं.

     

    बालस्वरुप राही की शायरी का दिया हवाला

    पूर्व सीएम मरांडी को हेमंत की मुस्काराहट पर बालस्वरुप राही के शेर की याद आ गयी और  उन्होंने लिखा कि “मैं उसे ख़ुद भी समझ बैठा हूँ अपना चेहरा, मैंने ओढ़ा था मुखौटा जो जमाने के लिए”  साफ है कि बाबूलाल को सीएम हेमंत की मुस्कराहट में एक मुखौटा नजर आ रहा है, उनका मानना है कि सीएम हेमंत अपने गमे दर्द को छुपाने के लिए इन मुस्कराहटों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन यह मुस्कराहट उनकी पहचान नहीं, एक बेचैनी है.

    लेकिन उसकी पहली पंक्ति को पढ़ना भूल गयें बाबूलाल

    हालांकि बाबूलाल मरांडी बालस्वरुप राही की उन पंक्तियों को उद्धृत करना भूल गये कि जिसमें राही ने  भारतीय राजनीति में चाटुकारिता की उगती पौधों पर तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा था कि  “ ढूंढ़ रह हो गांव-गांव जाकर जिस सच्चाई को,  सच सिर्फ वही होता है, जो दिल्ली दरबार कहे”  शायद बालस्वरुप राही ने यह पंक्तियां बाबूलाल मरांडी सरीखे राजनेताओं को सामने रख कर ही लिखा होगा.  


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