बाबूलाल का मिजाज सेक्लूयर, लेकिन भाजपा में घुसते ही चढ़ गया नफरती रंग, आदिवासी इतना तेज कैसे वाले बयान पर इरफान की सफाई

    बाबूलाल का मिजाज सेक्लूयर, लेकिन भाजपा में घुसते ही चढ़ गया नफरती रंग, आदिवासी इतना तेज कैसे वाले बयान पर इरफान की सफाई

    रांची(RANCHI)- आदिवासी इतना तेज कैसे? वाले बयान पर मचे कोहराम पर सफाई देते हुए कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने भाजपा पर उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है. डॉ. इरफान ने कहा है कि उनके निशाने पर बाबूलाल थें, ना कि आदिवासी समाज, लेकिन भाजपा अपने फितरत से बाज नहीं आयी, और उनके बयान को आदिवासी समाज के विरुद्ध बता कर राजनीतिक रोटी सेंकने का काम करने लगी.

     बयान को सही संदर्भ में  देखे जाने की जरुरत

    लेकिन कोई भी आरोप लगाने के पहले हमारे बयान को सही संदर्भ में रख कर देखे जाने की जरुरत है. आप विधान सभा की प्रोसिडिंग को निकलावर कर देख सकते हैं, मैंने तो सिर्फ इतना कहा था कि बाबूलाल एक सेक्लूयर सोच वाले इंसान हैं. दलित आदिवासी और अल्पसंख्यकों की भलाई की बात करते रहे हैं, उनके हक हकूक के लिए आवाज उठाते रहे हैं, बदले में आदिवासी दलित और अल्पसंख्यकों ने अपना कीमती मत प्रदान कर उन्हे इस मुकाम तक पहुंचाया, लेकिन यह क्या हो गया कि लेकिन भाजपा में घुसते ही उन पर नफरती रंग चढ़ गया.  अब तो वह इसी समुदाय के खिलाफ काम करते नजर आने लगे हैं, उनके हक हकूक के विपरीत थैलीशाहों की वकालत करने लगे हैं,  इसी संदर्भ में मैंने कहा था कि एक आदिवासी इतना तेज  कैसे हो सकता है. अब आप समझ सकते हैं कि हमारे तेज का क्या अभिप्राय क्या था. यहां तेज का अभिप्राय धोखा और गद्दारी से था, हम आदिवासी समाज की प्रतिभा, ईमानदारी और सादगी पर कोई सवाल खड़ा नहीं कर रहे थें.

    हम यह सवाल पूछ रहे थें कि उनके पास यह जहर आया कहां से? भाजपा में जाते ही घृणा, नफरत और इस विभाजनकारी सोच से बाबूलाल इतनी जल्दी रंग कैसे गये? लेकिन भाजपा को तो नफरती सोच में मास्टर डिग्री प्राप्त है. वह हमारे इस बयान को तोड़ फोड़ कर इसकी मार्केटिंग में जुट गयी.


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