बाबानगरी में होलिका दहन के बाद होता है हर से हरि का मिलन,अद्भुत नजारे को देखने के लिए उमड़ती है भक्तों की भीड़, पढ़ें इस साल कितने बजे निर्धारित है समय     

    बाबानगरी में होलिका दहन के बाद होता है हर से हरि का मिलन,अद्भुत नजारे को देखने के लिए उमड़ती है भक्तों की भीड़, पढ़ें इस साल कितने बजे निर्धारित है समय     

     देवघर(DEOGHAR):देश के बारह पवित्र द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक देवघर स्थित बैद्यनाथधाम भी शामिल है. पुराणों में बैद्यनाथधाम की महिमा का विशद उल्लेख किया गया है. यहाँ शिव और शक्ति दोनों विराजमान है. शास्त्रों के अनुसार यहां माता सती के हृदय और भगवान शिव के आत्मलिंग दोनों का समिश्रण है. यही कारण है कि यहां स्थित ज्योतिर्लिंग की महिमा का पुराणों में भी गुणगान किया गया है. जानकार बताते हैं कि सतयुग में ही इसका नाम बैद्यनाथ रखा गया था. इनकी मानें तो शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग मे शिव के अनन्य भक्त रावण द्वारा पवित्र शिवलिंग का यहां लेकर आना और भगवान विष्णु के कर-कमलों द्वारा उसी पवित्र जगह पर शिवलिंग को स्थापित करना जहां माता सती का हृदय गिरा था इसकी पटकथा सतयुग में लिखा गया था. ऐसी ही खास विशेषताओं से अलंकृत यह शैव स्थल बाँकी तीर्थस्थलों से अलग पहचान रखता है.  

    बैद्यनाथ धाम का स्थापना होलिका दहन के बाद हुआ था

      जानकर बताते हैं कि कैलाश पर्वत से रावण जब ज्योर्तिलिंग को लंका ले जा रहा था तभी उसे लघुशंका लगी. तब भगवान विष्णु ने चरवाहा का भेष बदलकर रावण के हाथों से ज्योर्तिलिंग को ले लिया. तब भगवान विष्णु ने इस ज्योर्तिलिंग को वहाँ स्थापित किया जहाँ माता सती का हृदय गिरा था. विष्णु के हाथों हर यानी भोलेनाथ की स्थापना उसी दिन किया गया था जिस दिन होली थी. होलिका दहन के ठीक बाद स्थापित ज्योर्तिलिंग के कारण बैद्यनाथ धाम का इस दिन स्थापना दिवस मनाया जाता है. हरि विष्णु के हाथो बैद्यनाथ को स्थापित करने के दौरान हरि और हर का अद्भुत मिलन हुआ था. हरिहर मिलन के बाद होली का पर्व बाबानगरी देवघर में मनाया जाता है.  

    इस बार रात्रि में होगा हरि का हर के साथ मिलन

    देवघर के बैद्यनाथ धाम मंदिर में होली के अवसर पर हरि-हर मिलन की परंपरा चली आ रही है. परंपरा के अनुसार एक खास मुर्हूत पर हरि को पालकी पर बैठा कर पहले बाबा मंदिर प्रांगण लाया जाता है फिर शहर का भ्रमण कराते हुए बाबा मंदिर लाया जाता है और फिर पवित्र द्वादश ज्योर्तिलिंग के समीप रख कर हरि और हर को अबीर-गुलाल से सरोबर किया जाता है. हरि-हर मिलन के इस अद्भूत दृश्य को देखने श्रद्धालुओं की भीड़ देवघर में उमड़ पड़ती है. इस बार 24 मार्च की रात्रि 11 बजकर 20 मिनट में हरि का हर से मिलन कराया जाएगा. इससे पूर्व 24 मार्च की रात्रि 10 बजकर 40 मिनट में  होलिका दहन होगा.हरिहर मिलन के बाद बाबा मंदिर में बाबा बैद्यनाथ का श्रृंगार पूजा होगा फिर पट को बंद कर दिया जाएगा. भक्तों के लिए बाबा मंदिर का पट अगले दिन सुबह प्रातः कालीन पूजा से खोल दिया जाएगा.  

    देवघर में ही होता है हर से हरि का मिलन

       हरि और हर के मिलन की यह परंपरा बैद्यनाथ धाम के अवाला किसी अन्य द्वादश ज्योर्तिलिंग में प्रचलित नहीं है यही कारण है कि इस अद्भुत नजारा को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उस दिन उमड़ पड़ती है.हरिहर मिलन के समय श्रद्धालुओ द्वारा बाबा पर गुलाल-अबीर चढ़ा कर मंगलकामना और आपसी प्रेम बनाये रखने का आशीर्वाद मांगा जाता है. इसके बाद से देवघरवासी होली मनाते है.इस दिन बाबा मंदिर में होने वाली हरिहर मिलन का इंतजार लोगों को बेसब्री से रहता है.  

    रिपोर्ट-रितुराज सिन्हा 


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