दुनिया :इजरायल में राजनीतिक संकट गहराया, नेतन्याहू सरकार पर मंडराया सत्ता से बाहर होने का खतरा

इजरायल में राजनीतिक संकट गहराया, नेतन्याहू सरकार पर मंडराया खतरा

 

बेंजामिन नेतन्याहू  के नेतृत्व वाली इजरायली सरकार इस समय गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है. देश की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार में शामिल कई सहयोगी दलों के समर्थन वापस लेने की खबरों के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में पड़ गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात जल्दी नहीं सुधरे तो इजरायल में इस वर्ष दोबारा आम चुनाव कराए जा सकते हैं.

दरअसल, पिछले कई महीनों से इजरायल की राजनीति में अस्थिरता बढ़ती जा रही थी. गाजा युद्ध, सुरक्षा नीतियों और न्यायिक सुधारों को लेकर सरकार के भीतर ही मतभेद उभरने लगे थे. गठबंधन में शामिल कुछ दक्षिणपंथी और धार्मिक दल नेतन्याहू की नीतियों से नाराज बताए जा रहे हैं. इन दलों का आरोप है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही है.

इसी बीच विपक्ष ने भी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि नेतन्याहू की नीतियों के कारण देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेल रहा है और आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है. संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. यदि गठबंधन के कुछ और सांसद सरकार से अलग होते हैं तो नेतन्याहू सरकार अल्पमत में आ सकती है.

राजनीतिक संकट के बीच देश में जनता का गुस्सा भी बढ़ रहा है. तेल अवीव और यरुशलम समेत कई शहरों में हजारों लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार तुरंत इस्तीफा दे और नए चुनाव कराए जाएं. वहीं नेतन्याहू समर्थकों का कहना है कि मौजूदा संकट के समय नेतृत्व बदलना देश के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार गिरती है तो इजरायल में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हो सकता है. पिछले कुछ वर्षों में देश कई बार चुनावों का सामना कर चुका है, जिससे शासन व्यवस्था और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हुई हैं.

हालांकि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अब तक इस्तीफा देने के संकेत नहीं दिए हैं. उन्होंने अपने सहयोगी दलों से बातचीत जारी रखी है और सरकार बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले कुछ सप्ताह इजरायल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे. पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नेतन्याहू अपनी सरकार बचाने में सफल होते हैं या देश फिर से चुनावी मैदान में उतरता है.