जापान से ब्रिटेन तक लोग क्यों जमा कर रहे घरों में राशन-पानी का स्टॉक! क्या किसी बड़े संकट की है आहट?

दुनिया के कई विकसित देशों में इन दिनों आपातकालीन तैयारियों को लेकर हलचल तेज हो गई है. जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड समेत कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों को घरों में जरूरी सामान का स्टॉक रखने की सलाह दे रही हैं. लोगों से कहा जा रहा है कि वे खाने-पीने की चीजें, साफ पानी, दवाइयां और रोजमर्रा में काम आने वाला जरूरी सामान पहले से जुटाकर रखें.

जापान से ब्रिटेन तक लोग क्यों जमा कर रहे घरों में राशन-पानी का स्टॉक! क्या किसी बड़े संकट की है आहट?

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): दुनिया के कई विकसित देशों में इन दिनों आपातकालीन तैयारियों को लेकर हलचल तेज हो गई है. जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड समेत कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों को घरों में जरूरी सामान का स्टॉक रखने की सलाह दे रही हैं. लोगों से कहा जा रहा है कि वे खाने-पीने की चीजें, साफ पानी, दवाइयां और रोजमर्रा में काम आने वाला जरूरी सामान पहले से जुटाकर रखें. सरकारों की इस सलाह के बाद सवाल उठने लगा है कि आखिर अचानक कई देश अपने नागरिकों को ऐसी तैयारी करने के लिए क्यों कह रहे हैं? क्या दुनिया किसी बड़े संकट की ओर बढ़ रही है या फिर यह भविष्य में आने वाली आपदाओं से निपटने की सामान्य तैयारी है?

आखिर क्यों दी जा रही है ऐसी सलाह?

दरअसल, दुनिया के कई देशों को आशंका है कि आने वाले समय में प्राकृतिक आपदाओं, खराब मौसम, बाढ़, बिजली आपूर्ति बाधित होने, साइबर हमलों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण आम लोगों का जीवन प्रभावित हो सकता है. ऐसी स्थिति में ट्रैन्स्पर्टैशन, इंटरनेट, संचार और जरूरी सेवाएं ठप पड़ सकती हैं.

अगर किसी आपात स्थिति में बाजार बंद हो जाएं या सामान की आपूर्ति रुक जाए तो लोगों को खाने-पीने और दवाइयों जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान होना पड़ सकता है. इसी संभावना को देखते हुए सरकारें चाहती हैं कि नागरिक कम से कम कुछ दिनों तक अपनी जरूरतों का इंतजाम खुद कर सकें और बाहरी मदद पर पूरी तरह निर्भर न रहें.

किन देशों ने नागरिकों को किया सतर्क

इस तरह की तैयारियों को लेकर कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनमें ब्रिटेन, जर्मनी, नॉर्वे, फिनलैंड, फ्रांस, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, आयरलैंड, चेकिया, लिथुआनिया और यूरोपीय संघ शामिल हैं.

इन देशों की सलाह का मुख्य उद्देश्य लोगों को किसी भी मुस्किल परिस्थिति के लिए तैयार रखना है. हालांकि, सभी देशों की तैयारी और दिशा-निर्देश एक जैसे नहीं हैं. कहीं तीन दिन तो कहीं सात से दस दिन तक की जरूरतों का सामान घर में रखने की सलाह दी गई है.

ब्रिटेन में तीन दिन की तैयारी पर जोर

ब्रिटेन सरकार ने 'बी रेडी' अभियान के तहत लोगों को कम से कम 72 घंटे यानी तीन दिन तक की जरूरतों का सामान घर में रखने की सलाह दी है. इसमें पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, जरूरी दवाइयां, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियां, रेडियो, पावर बैंक और कुछ नकदी रखने की बात कही गई है. इसका मकसद यह है कि अगर किसी आपदा के कारण बिजली, इंटरनेट या दूसरी जरूरी सेवाएं प्रभावित होती हैं तो लोग शुरुआती दिनों में अपनी जरूरतें पूरी कर सकें.

जापान भी कर रहा है बड़ी तैयारी

जापान में भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है. इसी को ध्यान में रखते हुए वहां की सरकार आपातकालीन तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है.

जापान की नई राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी नागरिकों को कम से कम तीन दिन और संभव हो तो एक सप्ताह तक का भोजन, पानी और जरूरी सामान घर में रखने की सलाह देने की तैयारी में है. सरकार का मानना है कि बड़े भूकंप की स्थिति में बिजली, पानी और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. ऐसे में राहत और बचाव व्यवस्था पहुंचने तक लोगों के पास अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त सामान होना चाहिए.

अमेरिका में सैनिकों के लिए 90 दिनों की तैयारी

अमेरिका में भी आपातकालीन तैयारियों को लेकर चर्चा है, लेकिन यहां 90 दिनों की तैयारी का मामला आम नागरिकों के बजाय सैन्य ठिकानों से जुड़ा है.

योजना के तहत सैन्य ठिकानों को इस तरह तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है कि किसी बड़े युद्ध, साइबर हमले या जरूरी आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में वे लंबे समय तक बाहरी सप्लाई पर निर्भर हुए बिना काम कर सकें. इसका उद्देश्य संकट के समय सैन्य गतिविधियों और जरूरी कामकाज को जारी रखना है.

क्या दुनिया में किसी बड़े खतरे की आहट है

कई देशों की ओर से एक साथ ऐसी सलाह जारी किए जाने से लोगों के मन में युद्ध या किसी बड़े वैश्विक संकट की आशंका पैदा होना स्वाभाविक है. हालांकि, इन दिशा-निर्देशों का मतलब यह नहीं है कि किसी बड़े युद्ध या आपदा की पुष्टि हो चुकी है. दरअसल, सरकारें चाहती हैं कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में नागरिक घबराएं नहीं और शुरुआती दिनों में अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह सरकारी सहायता का इंतजार न करना पड़े.