UN में फिर भिड़े भारत-पाकिस्तान! शहबाज ने उठाया कश्मीर-पानी का मुद्दा, जयशंकर ने आतंकवाद पर दिया करारा जवाब
UN महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कश्मीर, सिंधु जल संधि और 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का मुद्दा उठाया. अगले दिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद और भारत के आत्मरक्षा के अधिकार पर भारत का पक्ष रखा.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी बयानबाजी का गवाह बना है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UN में अपने भाषण के दौरान कश्मीर, सिंधु जल संधि और 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का मुद्दा उठाया. इसके एक दिन बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का पक्ष रखते हुए पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और साफ कर दिया कि आतंकवाद के मामले में भारत अपने बचाव का अधिकार इस्तेमाल करेगा.
शहबाज शरीफ ने UN में फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में दोबारा तनाव से बचने के लिए कश्मीर का "न्यायपूर्ण और उचित समाधान" जरूरी है. उन्होंने 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का भी जिक्र किया और इसमें अमेरिका के हस्तक्षेप को लेकर अपनी बात रखी.
शरीफ ने सिंधु जल संधि को लेकर भी भारत पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या मोड़ने की कोशिश को उनका देश युद्ध की कार्रवाई के तौर पर देखेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखा है.

जयशंकर ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा
पाकिस्तान के बयान के अगले दिन एस जयशंकर ने UN महासभा में भारत का पक्ष रखा. उन्होंने पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन "आतंकवाद के लगातार अभ्यास करने वाले" देश का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके परिणामों से बचने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी.
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बना हुआ है. खास तौर पर जब आतंकवाद को सीमा पार से समर्थन मिलता है, तो यह सिर्फ किसी एक देश की सुरक्षा का मुद्दा नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन जाता है.

भारत ने साफ किया- आतंकवाद और दोस्ती साथ नहीं चल सकते
जयशंकर ने अपने भाषण में यह भी साफ किया कि आतंकवाद और सामान्य रिश्ते एक साथ नहीं चल सकते. उनका कहना था कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है, उसे अपनी नीति बदलनी होगी. भारत ने इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीरो टॉलरेंस और आतंकवाद की फंडिंग पर सख्ती की जरूरत पर भी जोर दिया.
भारत की ओर से UN में जवाब देते हुए प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने भी पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया और कहा कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा.

असली विवाद सिर्फ कश्मीर तक सीमित नहीं
भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद की जड़ सिर्फ कश्मीर नहीं है. आतंकवाद, सीमा पार हिंसा, सिंधु जल संधि और दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी भी रिश्तों को प्रभावित करती है. हालिया UN बहस में भी यही मुद्दे अलग-अलग रूप में सामने आए.
ऐसे में जयशंकर का बयान भारत की उस स्थिति को दोहराता है जिसमें आतंकवाद को दोनों देशों के सामान्य संबंधों से अलग करके नहीं देखा जाता. दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार कश्मीर और जल विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाता रहा है.
फिलहाल UN महासभा में हुई ताजा बयानबाजी से इतना साफ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर, आतंकवाद और पानी का विवाद अभी भी बेहद संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है. दोनों देशों के बीच बातचीत और रिश्तों की दिशा पर आने वाले दिनों में इन मुद्दों का असर दिखाई दे सकता है.