US-Iran War: ईरान का बड़ा पलटवार, जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर हमला, A-10 समेत कई फाइटर जेट्स को नुकसान

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर हमले की खबर है. इसमें अमेरिकी A-10 थंडरबोल्ट का एक विंग क्षतिग्रस्त होने और करीब आठ F-15 विमानों को मामूली नुकसान पहुंचने की बात कही गई है.

US-Iran War: ईरान का बड़ा पलटवार, जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर हमला, A-10 समेत कई फाइटर जेट्स को नुकसान

टिएनपी डेस्क(TNP DESK): अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग लगातार तेज होती जा रही है. ईरान के तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के बाद अब ईरान की ओर से बड़ी जवाबी कार्रवाई की खबर सामने आई है. गुरुवार शुबह जॉर्डन में मौजूद मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस को निशाना बनाया गया. इस हमले में अमेरिकी सेना के कई लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है.

ईरानी हमले में अमेरिका के A-10 थंडरबोल्ट विमान का एक विंग क्षतिग्रस्त हो गया. इस विमान को 'वार्थोग' के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा करीब आठ F-15 लड़ाकू विमानों को मामूली नुकसान पहुंचने की बात कही गई. हालांकि, इन F-15 विमानों को हुए नुकसान को ज्यादा गंभीर नहीं बताया गया और उन्हें दोबारा सर्विस में लगा दिया गया.

हमले रोकने के लिए अमेरिका ने दागीं 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें

ईरान की ओर से किए गए हमलों को रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें दागीं. इसके बावजूद एयरबेस पर मौजूद कुछ सैन्य विमानों को नुकसान पहुंचा.

यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच समुद्र में भी टकराव बढ़ गया है. अमेरिका ने इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान के पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाया था. अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश के जवाब में की गई थी.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने अमेरिकी कार्रवाई के बाद जवाब देने की बात कही थी. इसके बाद IRGC ने दावा किया कि उसने आठ टैंकरों और दो युद्धपोतों को निशाना बनाया है. ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमले का दावा भी किया गया. हालांकि, ईरान की ओर से किए गए इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

अमेरिका के लिए क्यों अहम है जॉर्डन का यह एयरबेस

मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस अमेरिका के लिए इस इलाके में काफी अहम माना जाता है. यहां अमेरिका के कई लड़ाकू विमान तैनात और ऑपरेट होते हैं. ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने में भी यह बेस अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण एयरपावर हब की तरह काम करता है. ऐसे में इस बेस को निशाना बनाया जाना दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर भारी मिसाइल हमला करने की बात कही है. ईरानी पक्ष ने इसे अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया है.

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हमले और जवाबी हमले का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है. पहले तेल टैंकर और युद्धपोत निशाने पर थे, लेकिन अब सैन्य एयरबेस और लड़ाकू विमानों तक टकराव पहुंच गया है. हालात ऐसे ही बिगड़ते रहे तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा के साथ समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर भी पड़ सकता है.