होर्मुज में बढ़ी हलचल तो दुनिया में महंगा हुआ तेल, US-Iran की जंग भारत के लिए क्यों बन सकती है मुश्किल?
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब तेल टैंकरों और समुद्री रास्तों तक पहुंच गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव के बीच Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो भारत के आयात बिल से लेकर ट्रांसपोर्ट लागत तक पर दबाव बढ़ सकता है.
टिएनपी डेस्क(TNP DESK): अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब जमीन और सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर तेल के टैंकरों और समुद्री रास्तों तक पहुंच गई है. बीते दो दिनों में जिस तरह तेल ले जाने वाले जहाजों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हमले बढ़े हैं, उसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. 8 सितंबर को अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया. इसके बाद 9 सितंबर को ईरान ने पलटवार का दावा करते हुए अमेरिकी जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाने की बात कही. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमत और समुद्री व्यापार पर दिखाई देने लगा है.
8 सितंबर को अमेरिका ने 5 ईरानी तेल टैंकरों पर किया हमला
मंगलवार यानी 8 सितंबर को अमेरिकी सेना ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया. अमेरिका के सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की कोशिश के जवाब में की गई.
अमेरिका का कहना है कि उसका युद्धपोत ईरानी हमलों से बच गया और किसी अमेरिकी जवान को नुकसान नहीं पहुंचा. इसके बाद अमेरिकी सेना ने गल्फ ऑफ ओमान और खार्ग आइलैंड के पास ईरानी तेल टैंकरों पर कार्रवाई की. अमेरिकी पक्ष का दावा है कि हमले से पहले जहाजों पर मौजूद क्रू को उन्हें खाली करने की चेतावनी दी गई थी.
इस घटनाक्रम के बाद यह साफ हो गया कि अमेरिका अब ईरान के तेल कारोबार और उससे जुड़े समुद्री नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ा रहा है.

9 सितंबर को ईरान का पलटवार, समुद्र में बढ़ा तनाव
अमेरिकी कार्रवाई के बाद बुधवार यानी 9 सितंबर को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जवाबी हमलों का दावा किया. ईरान ने कहा कि उसने फारस की खाड़ी में दो अमेरिकी जहाजों और आठ तेल टैंकरों को निशाना बनाया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
ईरान ने यह भी दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रतिबंधित और असुरक्षित बताए गए इलाके में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे 10 और जहाजों को निशाना बनाया गया. इसके साथ ही ईरान ने कहा कि होर्मुज पर उसकी निगरानी बनी हुई है.
इससे पहले ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सेना के अल-अजरक एयरबेस को भी मिसाइलों से निशाना बनाया. इस तरह दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों का दायरा तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है.
क्यों दुनिया के लिए सबसे बड़ी चिंता बना होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है. फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है. इसलिए यहां थोड़ी सी रुकावट भी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है.
तनाव के बीच होर्मुज से जहाजों की आवाजाही में कमी भी देखी गई है. शिपिंग कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चिंता जहाजों और उनके क्रू की सुरक्षा है. खतरा बढ़ने पर बीमा की लागत बढ़ सकती है और कंपनियां लंबे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकती हैं. इससे माल ढुलाई महंगी होने का खतरा है.

100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
अमेरिका-ईरान तनाव का असर तेल बाजार पर भी दिखाई दिया है. बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया. इसकी बड़ी वजह निवेशकों के बीच यह डर है कि अगर होर्मुज और आसपास के समुद्री रास्तों पर संघर्ष और बढ़ा तो खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही दबाव में है. ऐसे में टैंकरों को सीधे निशाना बनाए जाने से बाजार की चिंता और बढ़ गई है.
भारत पर भी पड़ सकता है असर
इस संघर्ष पर भारत की नजर भी बनी रहना स्वाभाविक है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है.
महंगा कच्चा तेल पेट्रोल-डीजल, विमान ईंधन और ट्रांसपोर्ट की लागत को प्रभावित कर सकता है. माल ढुलाई महंगी होने का असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक पहुंचने का जोखिम रहता है. समुद्री रास्तों में रुकावट से भारतीय कंपनियों के आयात-निर्यात पर भी दबाव पड़ सकता है.
अब तेल बना जंग का नया हथियार
8 और 9 सितंबर के घटनाक्रम बताते हैं कि अमेरिका-ईरान संघर्ष ने नया और ज्यादा खतरनाक रूप लेना शुरू कर दिया है. पहले सैन्य ठिकाने और हथियार इस टकराव के केंद्र में थे, लेकिन अब तेल टैंकर और समुद्री रास्ते सीधे निशाने पर आ रहे हैं.
अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा. तेल की कीमत, जहाजों की आवाजाही, बीमा, माल ढुलाई और महंगाई के जरिए इसकी कीमत दुनिया के दूसरे देशों को भी चुकानी पड़ सकती है. यही कारण है कि अब दुनिया की नजर युद्ध के मैदान के साथ उस संकरे समुद्री रास्ते पर भी टिकी है, जहां से गुजरने वाले जहाज वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं.