नेपाल में तबाही के बीच बड़ी राहत, 10 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर, भारत भी हर मोर्चे पर मदद में जुटा
नेपाल की त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से करीब 10 दिन बाद दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. दोनों के जिंदा मिलने से बाकी फंसे लोगों की तलाश को लेकर उम्मीद बढ़ी है.
टिएनपी डेस्क(TNP DESK): नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच करीब 10 दिन बाद एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. शुक्रवार सुबह रेस्क्यू टीम ने संजय साह और कबीर महर्जन को सुरंग से बाहर निकाला. दोनों के जिंदा मिलने के बाद राहत और बचाव अभियान में जुटी टीमों की उम्मीद बढ़ गई है.
सुरंग में आवाज सुनाई देने के बाद तेज हुआ रेस्क्यू
बाढ़ के बाद इस सुरंग में 42 मजदूरों और कर्मचारियों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरंग के अंदर से इंसानी आवाज सुनाई देने की खबर मिली. इसके बाद नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सुरंग के अंदर पहुंचीं और तलाश तेज कर दी गई. दो मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने से बाकी लोगों की तलाश को लेकर भी उम्मीद जगी है.
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बेहद खराब हैं. 5,300 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 1,259 लोगों की मौत हो चुकी है. राहत और बचाव टीमों ने अब तक 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है. चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद हुए हैं. बरामद शवों में से 95 की पहचान हो चुकी है.
राहत से लेकर मेडिकल मदद तक भारत की बड़ी भूमिका
नेपाल की इस आपदा के बीच भारत लगातार मदद पहुंचा रहा है. 3 सितंबर तक भारत पांच खेपों में करीब 74 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है. इसमें जरूरी दवाइयां भी शामिल हैं. भारत ने केवल सामान ही नहीं भेजा, बल्कि डॉक्टर, पैरामेडिक्स, बचावकर्मी, सुरंग विशेषज्ञ और फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीमें भी नेपाल भेजी हैं.
नुवाकोट में नेपाल-भारत मैत्री भवन भी बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत का केंद्र बना हुआ है. 2015 के भूकंप के बाद भारत की मदद से दोबारा तैयार किए गए इस परिसर में मौजूद अस्पताल में 11 डॉक्टर प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं. बाढ़ के कारण घर छोड़ने वाले कई लोगों ने यहां शरण ली है.

सुरंगों और शवों की पहचान में भी भारत की मदद
नेपाल में कई हाइड्रोपावर सुरंगों में कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है. इसी को देखते हुए 30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची. यह टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रही है.
वहीं, बरामद शवों की पहचान के लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भी भेजी है. भारतीय विशेषज्ञ नेपाल की टीम के साथ मिलकर DNA सैंपल की जांच कर रहे हैं. इससे उन लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिनके शव बाढ़ के बाद मिले हैं.

राहत के साथ पुनर्निर्माण पर भी फोकस
भारत ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त नुवाकोट के त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को दोबारा बनाने का फैसला किया है. यानी भारत की मदद सिर्फ राहत और बचाव तक सीमित नहीं है. इलाज, सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश, टूटे रास्तों को जोड़ने, शवों की पहचान और जरूरी पुनर्निर्माण तक भारत नेपाल के साथ खड़ा है.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी संसद में भारत की मदद के लिए आभार जताया है. इससे पहले 2015 के भूकंप के दौरान भारत ने ऑपरेशन मैत्री के जरिए नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया था. इस बार भी भारत की कोशिश है कि पड़ोसी देश को संकट से बाहर निकालने में हर संभव मदद दी जाए.