लेबनान संकट के बीच ईरान का बड़ा संकेत, क्या बंद हो सकता है होर्मुज स्ट्रेट?

ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही युद्धविराम वार्ता को फिलहाल रोक दिया है. तेहरान का कहना है कि जब तक लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई बंद नहीं होती, तब तक किसी नई बातचीत की संभावना नहीं है. इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी वैश्विक चिंता बढ़ गई है.

लेबनान संकट के बीच ईरान का बड़ा संकेत, क्या बंद हो सकता है होर्मुज स्ट्रेट?

TNP DESK: मिडल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही सीजफायर (युद्धविराम) बातचीत को फिलहाल रोक दिया है. ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान में इजराइल के हमले बंद नहीं होते, तब तक वह किसी भी तरह की नई बातचीत शुरू नहीं करेगा.

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर हो रही है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है. इसलिए यहां होने वाली किसी भी हलचल का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है.

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान का मानना है कि लेबनान में शांति बनाए रखना किसी भी युद्धविराम समझौते का अहम हिस्सा होना चाहिए. लेकिन इजराइल की ओर से जारी सैन्य कार्रवाई के कारण हालात और बिगड़ रहे हैं. इसी वजह से ईरान ने बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है.

ईरान ने मांग की है कि गाजा और लेबनान में सैन्य अभियान तुरंत रोके जाएं और लेबनानी क्षेत्र से इजराइली सेना को वापस बुलाया जाए. ईरान का कहना है कि जब तक इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक वह वार्ता की मेज पर नहीं लौटेगा.

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान और उसके सहयोगी कुछ बड़े रणनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों को प्रभावित करने की संभावना भी शामिल बताई जा रही है. हालांकि अभी तक जलडमरूमध्य को बंद करने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन इस तरह की चर्चा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है.

अगर होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की रुकावट आती है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. भारत समेत कई ऐसे देश हैं जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से आने वाले तेल पर निर्भर हैं. ऐसे में इस समुद्री मार्ग का महत्व और भी बढ़ जाता है.

फिलहाल दुनिया की नजरें ईरान, इजराइल और लेबनान के बीच बन रहे हालात पर टिकी हैं. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कोई बड़ा कदम उठाया जाता है या नहीं. क्योंकि इस रास्ते से जुड़ा कोई भी फैसला वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है.