होर्मुज में भारतीयों से भरे जहाज पर ईरानी घेराबंदी, 21 नाविकों का वीडियो आया सामने
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव से भारतीय मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव से भारतीय मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है.
टिएनपी डेस्क(TNP DESK): पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब समुद्र के रास्ते होने वाले कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े सैन्य तनाव ने दुनिया की समुद्री सप्लाई चेन के साथ भारतीय मर्चेंट नेवी के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. भारत दुनिया के बड़े समुद्री कार्यबल वाले देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर काम करते हैं. ऐसे में इस इलाके में बढ़ता खतरा सीधे उनकी सुरक्षा से जुड़ गया है.
होर्मुज क्यों बना सबसे बड़ा चिंता का कारण?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री रास्ता है. दुनिया के तेल और एलएनजी कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. इसलिए यहां तनाव बढ़ने का असर सिर्फ जहाजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध पूरी वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था से होता है.
हाल के सैन्य तनाव के बाद इस इलाके से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है. किसी भी तरह का हमला या समुद्री मार्ग में रुकावट तेल, गैस और दूसरे जरूरी सामान की सप्लाई को प्रभावित कर सकती है.
हमलों में नाविकों की जान गई
संयुक्त राष्ट्र की जून में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं. इन घटनाओं में कम से कम 15 नाविकों की मौत की बात कही गई है. इनमें भारतीय नाविक भी शामिल बताए गए हैं.
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस समुद्री रास्ते पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए खतरा कितना गंभीर हो गया है. जहाज पर मौजूद नाविक किसी सैन्य संघर्ष का हिस्सा नहीं होते, लेकिन व्यापारिक जहाजों के कारण वे सीधे जोखिम वाले इलाके में पहुंच जाते हैं.

एक वीडियो ने दिखाई खतरे की तस्वीर
अप्रैल में फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से जारी एक वीडियो ने भी इस खतरे को सामने रखा. वीडियो में पनामा के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौकाओं से घिरे हुए दिखाया गया था.
रिपोर्ट के अनुसार, जहाज पर 21 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक सभी भारतीय नाविक सुरक्षित रहे. हालांकि, इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि युद्ध जैसे हालात में व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए.
भारत सरकार ने उठाया बड़ा कदम
स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने भी सावधानी बढ़ा दी है. एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद भारत ने ईरान के उप-राजदूत को तलब कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी.
इसके बाद जहाजरानी महानिदेशालय ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर अहम निर्देश जारी किए. जहाज मालिकों, शिप मैनेजरों और भर्ती एजेंसियों को कहा गया कि वे भारतीय नाविकों को फिलहाल ऐसे जहाजों पर तैनात करने से बचें, जिन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरना है.
कप्तानों को भी सतर्क रहने का निर्देश
भारतीय अधिकारियों ने फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम करने वाले जहाजों के कप्तानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है. उन्हें समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चेतावनियों पर लगातार नजर रखने और किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.
संकट सिर्फ नाविकों का नहीं
होर्मुज का तनाव भारतीय नाविकों के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अहम है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और गैस के आयात से पूरा करता है. अगर इस समुद्री रास्ते पर लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित होती है, तो तेल की कीमत, शिपिंग लागत और सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
यानी होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट सिर्फ समुद्र में चल रहे जहाजों की परेशानी नहीं है. इसके पीछे भारतीय नाविकों की सुरक्षा, देश की ऊर्जा जरूरत और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था का सवाल जुड़ा हुआ है. फिलहाल भारत की प्राथमिकता अपने समुद्री कर्मचारियों को जोखिम वाले इलाकों से दूर रखना और बदलते हालात पर लगातार नजर बनाए रखना है.