ईरान-अमेरिका आमने-सामने, सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा,भारतीय कंपनी पर भी लगा प्रतिबंध

ईरान-अमेरिका आमने-सामने, सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा,भारतीय कंपनी पर भी लगा प्रतिबंध

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों देशों के बीच चल रहे टकराव का असर अब समुद्री व्यापार, सैन्य गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखाई देने लगा है. एक तरफ ईरान जवाबी कार्रवाई के दावे कर रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका इन दावों को खारिज कर रहा है. इस बीच कई देशों ने अपने जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.

ईरान ने किए जवाबी हमले के दावे

ईरान की सेना ने दावा किया है कि उसने कुवैत में मौजूद अहमद अल-जबर एयर बेस और बहरीन के शेख ईसा एयर बेस को निशाना बनाया. ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई उसके क्षेत्र में हुए अमेरिकी हमले के जवाब में की गई है. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों से सैन्य ठिकानों और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है.

हालांकि अमेरिका ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि ईरान की ओर से दागी गई सभी मिसाइलों और ड्रोन को समय रहते रोक दिया गया. अमेरिका ने यह भी कहा कि उसके किसी सैन्य विमान या ठिकाने को नुकसान नहीं पहुंचा है और सभी अभियान सामान्य रूप से जारी हैं.

अमेरिकी संसद में भी गूंजा मुद्दा

ईरान को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है. अमेरिकी सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने का एक प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन यह सिर्फ एक वोट से खारिज हो गया. इससे साफ है कि इस मुद्दे पर अमेरिकी नेताओं के बीच भी अलग-अलग राय बनी हुई है.

उधर, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कहा कि हाल के हमलों में मारे गए लोगों का जवाब दिया जाएगा और जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.

भारतीय कंपनी पर भी लगा प्रतिबंध

तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान से जुड़े कारोबार पर भी सख्ती बढ़ा दी है. अमेरिकी प्रशासन ने छह संस्थाओं और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. इनमें भारत की स्कीज ट्रैवल्स एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड का नाम भी शामिल है.

अमेरिका का आरोप है कि यह कंपनी ईरान की महान एयर से जुड़े व्यावसायिक और लॉजिस्टिक कामों में सहयोग कर रही थी. कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, वह वर्ष 2020 से महान एयर की जनरल सेल्स एजेंट के रूप में काम कर रही थी.

भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की. उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में व्यापारिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.

जयशंकर ने यह भी दोहराया कि भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान निकालने का पक्षधर रहा है. उन्होंने सभी पक्षों से तनाव कम करने और शांति बनाए रखने की अपील की.

दुनिया की नजर पश्चिम एशिया पर

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ दो देशों का मामला नहीं रह गया है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है. इसलिए दुनिया के कई देश हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. आने वाले दिनों में दोनों देशों के कदम तय करेंगे कि यह तनाव बातचीत से कम होगा या फिर क्षेत्र में हालात और ज्यादा गंभीर बनेंगे.