BRICS Summit में भारत की बड़ी डील, समझौते और फैसले से अब दुनिया पर क्या पड़ेगा असर? पढिए

भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां BRICS Summit हुआ. इस बैठक में BRICS के विस्तार के बाद बदलती वैश्विक तस्वीर, व्यापार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, निवेश और ग्लोबल साउथ जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.

BRICS Summit में भारत की बड़ी डील, समझौते और फैसले से अब दुनिया पर क्या पड़ेगा असर? पढिए

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां BRICS Summit हुआ. इस बैठक में BRICS के विस्तार के बाद बदलती वैश्विक तस्वीर, व्यापार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, निवेश और ग्लोबल साउथ जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. लेकिन इस समिट की खास बात सिर्फ बड़े नेताओं की मुलाकात नहीं रही. बैठक में कई ऐसे फैसले और निवेश की घोषणाएं भी सामने आईं, जिनका असर आने वाले समय में भारत के व्यापार और निवेश पर देखने को मिल सकता है.

UAE के साथ बड़ा निवेश

BRICS Summit के दौरान भारत और UAE के बीच निवेश और रणनीतिक सहयोग पर खास बातचीत हुई. UAE की International Holding Company ने ओडिशा में करीब 11.5 अरब डॉलर के इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम प्रोजेक्ट में निवेश का ऐलान किया. इस प्रोजेक्ट का मकसद ओडिशा को एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग के बड़े सेंटर के तौर पर विकसित करना है. इससे भारत में विदेशी निवेश बढ़ने के साथ इंडस्ट्री और रोजगार के नए मौके बनने की उम्मीद है.

इसके अलावा दोनों देशों के बीच डिफेंस, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी बात हुई.

चीन के साथ भी बातचीत अहम

समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. दोनों नेताओं ने भारत-चीन रिश्तों को आगे बढ़ाने और लंबे समय के नजरिए से काम करने पर जोर दिया. बातचीत में सीमा पर शांति, व्यापार, सप्लाई चेन और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे अहम रहे. हालांकि इस दौरान कोई बड़ी नई ट्रेड डील सामने नहीं आई, लेकिन दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश जरूर अहम मानी जा रही है. भारत के लिए चीन के साथ व्यापार घाटा लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा रहा है. ऐसे में अगर बाजार तक पहुंच और सप्लाई चेन से जुड़े मामलों में आगे बढ़त होती है, तो भारतीय कंपनियों के लिए कुछ नए रास्ते खुल सकते हैं.

BRICS में लोकल करेंसी से कारोबार की तैयारी

समिट में BRICS देशों के बीच स्थानीय करेंसी में कारोबार को लेकर भी चर्चा हुई. BRICS Payment Task Force का मकसद सीमा पार पेमेंट को आसान और कम खर्च वाला बनाने के विकल्प तलाशना है. हालांकि भारत ने साफ किया है कि फिलहाल BRICS की कोई साझा करेंसी लाने की योजना नहीं है.

यानी बात सीधे डॉलर को हटाने की नहीं है. फोकस इस बात पर है कि अलग-अलग देशों के साथ जरूरत के हिसाब से लोकल करेंसी में पेमेंट के विकल्प बनाए जाएं. अगर यह सिस्टम आगे बढ़ता है तो कुछ देशों के साथ कारोबार में करेंसी कन्वर्जन और पेमेंट की लागत कम हो सकती है.

ब्राजील के साथ पुराने समझौतों पर भी फोकस

भारत और ब्राजील के रिश्तों में भी BRICS एक अहम प्लेटफॉर्म है. 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्राजील यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आतंकवाद और संगठित अपराध से मुकाबला, डिजिटल सॉल्यूशन, रिन्यूएबल एनर्जी, कृषि रिसर्च, डेटा सिक्योरिटी और बौद्धिक संपदा जैसे क्षेत्रों में छह समझौते हुए थे. इन समझौतों का असर आने वाले समय में डिजिटल टेक्नोलॉजी, खेती, क्लीन एनर्जी और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है.

तो भारत को इससे क्या फायदा हो सकता है?

अगर पूरे BRICS Summit को आसान भाषा में समझें, तो भारत का फोकस तीन बड़ी चीजों पर नजर आता है- विदेशी निवेश और इंडस्ट्री, नए बाजार और सप्लाई चेन, और डिजिटल-फाइनेंशियल सहयोग. नई दिल्ली घोषणा में व्यापार, निवेश, ग्लोबल वैल्यू चेन, डिजिटल ट्रेड डॉक्यूमेंटेशन और सीमा पार पेमेंट को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है. साथ ही BRICS Economic Partnership 2030 को आगे बढ़ाने में भारत के काम की भी सराहना की गई. यानी इस समिट का फायदा सिर्फ किसी एक बड़ी डील तक सीमित नहीं है. असली असर आने वाले समय में दिखाई देगा. अब देखना होगा कि निवेश की घोषणाएं कितनी जल्दी जमीन पर उतरती हैं, व्यापार में कितनी आसानी आती है और BRICS के इन फैसलों को सदस्य देश कितनी गंभीरता से लागू करते हैं.