दुबई में भारतीय मूल की इंजीनियर ने रचा इतिहास, 150 शब्द लिखकर गिनीज रिकॉर्ड में दर्ज कराया नाम
दुबई की 29 वर्षीय पुष्पाज्योति रविकुमार ने एक ही स्टिकी नोट पर 150 अलग-अलग शब्द लिखकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया.
दुबई की 29 वर्षीय पुष्पाज्योति रविकुमार ने एक ही स्टिकी नोट पर 150 अलग-अलग शब्द लिखकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया.
टिएनपी डेस्क (TNP DESK): स्टिकी नोट का इस्तेमाल आमतौर पर किसी जरूरी काम की याद दिलाने या छोटा सा मैसेज लिखने के लिए किया जाता है. लेकिन दुबई में रहने वाली 29 वर्षीय सीनियर क्लाउड इंजीनियर पुष्पाज्योति रविकुमार ने इसी छोटे से कागज को अपनी खास उपलब्धि का जरिया बना दिया. उन्होंने एक ही स्टिकी नोट पर 150 अलग-अलग शब्द लिखकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है. खास बात यह है कि इतने छोटे स्थान पर लिखे गए सभी शब्दों को साफ तौर पर पढ़ा जा सकता है.
बचपन से था गिनीज रिकॉर्ड बनाने का सपना
पुष्पाज्योति को बचपन से ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में काफी दिलचस्पी थी. वह अलग-अलग लोगों को अनोखे रिकॉर्ड बनाते देखती थीं और उनके मन में भी कुछ अलग करने की इच्छा थी. इसी दौरान उन्होंने अपनी लिखावट को चुनौती देने का फैसला किया.
पुष्पाज्योति को अलग-अलग स्टाइल में लिखना पसंद है. उन्होंने सोचा कि क्यों न इसी हुनर को एक ऐसे रिकॉर्ड में बदला जाए, जो उनकी पहचान बन सके. इसके बाद उन्होंने छोटे से स्टिकी नोट पर ज्यादा से ज्यादा शब्द लिखने की तैयारी शुरू की.
छोटे कागज पर 150 शब्द लिखना थी बड़ी चुनौती
एक स्टिकी नोट का आकार बहुत छोटा होता है. ऐसे में उस पर 150 अलग-अलग शब्द लिखना आसान काम नहीं था. चुनौती सिर्फ शब्दों की संख्या बढ़ाने की नहीं थी, बल्कि उन्हें साफ और अलग-अलग लिखना भी जरूरी था.
पुष्पाज्योति ने इसके लिए खास रणनीति बनाई. उन्होंने छोटे और आसान शब्दों को चुना. तीन अक्षरों वाले शब्दों को प्राथमिकता दी, ताकि सीमित जगह में ज्यादा शब्द लिखे जा सकें. साथ ही उन्होंने इस बात का भी ध्यान रखा कि शब्द आपस में मिलें नहीं और हर शब्द को आसानी से पढ़ा जा सके.

पहली कोशिश में ही रचा इतिहास
पुष्पाज्योति की मेहनत का नतीजा उनकी पहली कोशिश में ही सामने आया. उन्होंने एक स्टिकी नोट पर 150 अलग-अलग शब्द लिखने में सफलता हासिल की. उनकी इस उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली.
यह उपलब्धि उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने किसी असाधारण संसाधन के बजाय अपनी लिखावट के हुनर को रिकॉर्ड बनाने का आधार बनाया.
डिजिटल दौर में लिखावट ने दिलाई पहचान
आज ज्यादातर काम मोबाइल और कंप्यूटर के जरिए होता है. मैसेज भेजने से लेकर जरूरी बातें लिखने तक के लिए लोग डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हैं. ऐसे समय में हाथ से लिखने की कला को लेकर बनाया गया यह रिकॉर्ड काफी खास है.
पुष्पाज्योति का कहना है कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है. इस उपलब्धि ने उन्हें अपना हुनर दुनिया के सामने दिखाने का मौका दिया और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया.
उनकी कहानी यह बताती है कि बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए हमेशा बड़ा मंच जरूरी नहीं होता. कभी-कभी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली एक छोटी सी चीज भी किसी की प्रतिभा को दुनिया तक पहुंचा सकती है.