Bitcoin का बढ़ता दबदबा, क्या बदल रही है दुनिया की ट्रेड व्यवस्था?

Bitcoin से शुरू हुई Blockchain क्रांति अब दुनिया के अंतरराष्ट्रीय भुगतान सिस्टम को बदल रही है. Stablecoin, Tokenised Payment और Digital Currency के बढ़ते इस्तेमाल से Cross-Border Payment तेज और सस्ता होने की संभावना है.

Bitcoin का बढ़ता दबदबा, क्या बदल रही है दुनिया की ट्रेड व्यवस्था?

टिएनपी डेस्क(TNP DESK): दुनिया में कारोबार और पैसे के लेन-देन का तरीका तेजी से बदल रहा है. कभी अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान का मतलब बैंक, डॉलर और कई दिनों तक चलने वाली लंबी प्रक्रिया हुआ करती थी. अब Bitcoin, Stablecoin और Blockchain जैसी डिजिटल तकनीक ने इस पुराने सिस्टम को चुनौती देना शुरू कर दिया है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि Bitcoin ने डॉलर या बैंकों की जगह ले ली है. असली बदलाव यह है कि दुनिया अब डिजिटल और Blockchain आधारित पेमेंट सिस्टम की तरफ तेजी से बढ़ रही है.

Bitcoin ने इस बदलाव की शुरुआत जरूर की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में फिलहाल Bitcoin से ज्यादा Stablecoin और Tokenised Payment Systems की चर्चा हो रही है.

Bitcoin ने कैसे बदली पैसे को लेकर सोच?

Bitcoin की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी एक देश का केंद्रीय बैंक जारी नहीं करता. Blockchain नेटवर्क के जरिए एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को डिजिटल रूप से Bitcoin भेज सकता है.

इस मॉडल ने पहली बार बड़े स्तर पर यह दिखाया कि डिजिटल नेटवर्क पर बिना पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम के भी वैल्यू ट्रांसफर की जा सकती है.

BIS की रिसर्च के मुताबिक, 2017 से 2024 के बीच Bitcoin, Ether और प्रमुख Stablecoins का Cross-Border Flow काफी बड़ा रहा. 2021 में इनका आंकड़ा करीब 2.6 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचा था. हालांकि, Bitcoin और Ether के लेन-देन में निवेश और सट्टेबाजी की भूमिका ज्यादा दिखाई देती है. छोटे Bitcoin ट्रांजैक्शन और Stablecoin में भुगतान और Remittance जैसे इस्तेमाल भी देखने को मिले हैं.

असली गेम Stablecoin बदल सकता है

IMF के मुताबिक, Cross-Border Stablecoin Flow तेजी से बढ़ा है. USDT और USDC जैसे दो बड़े Dollar-Pegged Stablecoins का Gross Cross-Border Flow 2020 की पहली तिमाही के करीब 12 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 की पहली तिमाही में लगभग 316 अरब डॉलर हो गया था.

यानी डिजिटल करेंसी की दुनिया अब केवल Bitcoin खरीदने और बेचने तक सीमित नहीं है.

Stablecoins का इस्तेमाल भविष्य में विदेश पैसा भेजने, Remittance और Business Payment में बढ़ सकता है. IMF का मानना है कि इससे Cross-Border Payment तेज और सस्ता हो सकता है.

पुराने इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम में क्या परेशानी है?

मान लीजिए भारत की कोई कंपनी ब्राजील की कंपनी से सामान खरीदती है. भुगतान कई बैंकों और अलग-अलग Payment Systems से होकर गुजर सकता है.

इस प्रक्रिया में समय लगता है, फीस लगती है और Currency Conversion का खर्च भी जुड़ सकता है.

Blockchain आधारित सिस्टम इसी प्रक्रिया को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं. इसका मतलब यह नहीं कि बैंक खत्म हो जाएंगे. बल्कि बैंक खुद नई तकनीक अपना सकते हैं.

BIS का Project Agorá इसका अच्छा उदाहरण है. इसमें Central Bank Reserves और Commercial Bank Deposits को Tokenise करके Cross-Border Payment को ज्यादा तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है.

क्या डॉलर की ताकत कम हो जाएगी?

Bitcoin को लेकर अक्सर कहा जाता है कि इससे डॉलर का दबदबा खत्म हो सकता है. फिलहाल आंकड़े ऐसा संकेत नहीं देते.

दिलचस्प बात यह है कि Stablecoin का बढ़ता इस्तेमाल डॉलर को कमजोर करने के बजाय कुछ मामलों में उसकी पहुंच और बढ़ा सकता है.

BIS के मुताबिक, Stablecoins की कुल वैल्यू का करीब 98 प्रतिशत हिस्सा डॉलर में Denominated है. यानी दुनिया अगर Dollar-Based Stablecoins का ज्यादा इस्तेमाल करती है तो डिजिटल दुनिया में भी डॉलर की भूमिका मजबूत बनी रह सकती है.

इसलिए इसे सीधे 'Bitcoin बनाम Dollar' की लड़ाई समझना सही नहीं होगा.

Bitcoin को अपनाने का प्रयोग कितना सफल रहा?

Bitcoin को सरकारी स्तर पर अपनाने के अनुभव भी मिले-जुले रहे हैं. El Salvador ने 2021 में Bitcoin को Legal Tender बनाया था.

लेकिन IMF की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां वास्तविक आर्थिक लेन-देन में Bitcoin का इस्तेमाल काफी कम रहा. एक सर्वे में करीब 20 प्रतिशत कंपनियों ने Bitcoin स्वीकार करने की बात कही थी, जबकि बिक्री में Bitcoin की हिस्सेदारी केवल 4.9 प्रतिशत थी.

इससे पता चलता है कि किसी Cryptocurrency को कानूनी मान्यता देना और लोगों द्वारा रोजमर्रा में उसका इस्तेमाल करना दो अलग बातें हैं.

दुनिया की ट्रेड व्यवस्था में क्या बदल सकता है?

आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव भुगतान के तरीके में दिखाई दे सकता है. कंपनियों के पास पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम के अलावा Stablecoin, Tokenised Deposits और Central Bank Digital Currency जैसे विकल्प बढ़ सकते हैं.

इससे Cross-Border Settlement तेजी से हो सकता है. छोटे कारोबारियों के लिए विदेश से पैसा लेना आसान हो सकता है. Remittance की लागत कम हो सकती है और 24 घंटे डिजिटल भुगतान की सुविधा बढ़ सकती है.

लेकिन इसके साथ खतरे भी हैं.

तो क्या Bitcoin बदल देगा पूरी दुनिया का व्यापार?

फिलहाल इसका जवाब है कि Bitcoin अकेले दुनिया की ट्रेड व्यवस्था नहीं बदल रहा है. लेकिन Bitcoin से शुरू हुई Blockchain क्रांति ने पैसे भेजने और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के पुराने तरीके पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है.

भविष्य की असली लड़ाई केवल Bitcoin और Dollar के बीच नहीं होगी. मुकाबला इस बात का होगा कि Cross-Border Payment का सबसे तेज, सस्ता और भरोसेमंद सिस्टम कौन तैयार करता है.

Bitcoin ने दुनिया को बिना केंद्रीय संस्था वाले डिजिटल पैसे का मॉडल दिखाया. Stablecoins ने उसी तकनीक को स्थिर कीमत के साथ इस्तेमाल करने का रास्ता दिया. अब Central Banks और बड़े बैंक भी Tokenisation और Digital Currency की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

यानी आने वाले समय में दुनिया का व्यापार बैंकिंग सिस्टम से बाहर निकलने के बजाय एक नए Digital Financial System में बदल सकता है, जहां बैंक, Blockchain, Stablecoin और सरकारी Digital Currency सभी की अपनी-अपनी भूमिका होगी.