टीएनपी डेस्क(TNP DESK): अमेरिका ने अपनी आजादी के 250 साल पूरे होने के अवसर पर एक अनोखी पहल की है. फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में एक हाई-टेक टाइम कैप्सूल जमीन के नीचे दफनाया गया है. इस कैप्सूल का वजन करीब 408 किलोग्राम है और इसे अब से ठीक 250 साल बाद यानी वर्ष 2276 में खोला जाएगा. इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को यह दिखाना है कि वर्ष 2026 में अमेरिका की संस्कृति, तकनीक और समाज कैसा था.
क्या होता है टाइम कैप्सूल?
टाइम कैप्सूल एक खास तरह का कंटेनर होता है, जिसमें किसी दौर की जरूरी चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं. इसे लंबे समय तक बंद रखा जाता है और तय समय आने पर खोला जाता है. इससे भविष्य के लोग उस समय के इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और जीवनशैली के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. दुनिया के कई देशों ने अलग-अलग मौकों पर ऐसे टाइम कैप्सूल तैयार किए हैं.
कैप्सूल में क्या-क्या रखा गया है?
इस टाइम कैप्सूल में अमेरिका के सभी 50 राज्यों से चुनी गई कई खास वस्तुएं रखी गई हैं. इनमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान के कपड़े का हिस्सा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी भविष्यवाणियां और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं. इन वस्तुओं का चयन इस सोच के साथ किया गया है कि भविष्य की पीढ़ियां 2026 के अमेरिका को बेहतर ढंग से समझ सकें.
250 साल तक सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई खास तकनीक
इतने लंबे समय तक कैप्सूल को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी. इसलिए वैज्ञानिकों ने कई वर्षों तक शोध करने के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के प्रभाव से इसे बचा सके. कैप्सूल को पूरी तरह सील करने के लिए इंडियम नाम की विशेष धातु का उपयोग किया गया है. यह धातु बहुत छोटी दरारों को भी बंद कर देती है, जिससे अंदर हवा या पानी पहुंचने की संभावना बेहद कम हो जाती है.
बेलनाकार आकार क्यों चुना गया?
वैज्ञानिकों ने कैप्सूल को चौकोर बनाने के बजाय बेलनाकार आकार दिया है. उनका मानना है कि चौकोर संरचना के कोने समय के साथ कमजोर हो सकते हैं और वहां से पानी अंदर जाने का खतरा बढ़ जाता है. बेलनाकार डिजाइन अधिक मजबूत माना जाता है और लंबे समय तक सुरक्षित रहता है.
जमीन के 10 फीट नीचे किया गया दफन
इस टाइम कैप्सूल को फिलाडेल्फिया में जमीन से लगभग 10 फीट नीचे स्थापित किया गया है. इस गहराई पर तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और मौसम का असर भी कम पड़ता है. इसके ऊपर अतिरिक्त स्टील का सुरक्षा आवरण भी लगाया जाएगा, जिससे पानी और अन्य बाहरी प्रभावों से इसे अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके.
भारत ने भी बनाया था टाइम कैप्सूल
अमेरिका ही नहीं, भारत ने भी वर्ष 1973 में अपनी आजादी के 25 साल पूरे होने पर एक टाइम कैप्सूल तैयार किया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में दिल्ली के लाल किले के पास 'कालपात्र' नाम से इसे जमीन में दफनाया गया था. इसमें संविधान की प्रति, स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास और उस समय के कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज रखे गए थे. हालांकि, 1977 में सरकार बदलने के बाद इसे जमीन से निकाल लिया गया और बाद में यह राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया.
भविष्य के लिए इतिहास को सहेजने की कोशिश
टाइम कैप्सूल केवल एक धातु का डिब्बा नहीं होता, बल्कि यह किसी देश की यादों, उपलब्धियों और पहचान को भविष्य तक पहुंचाने का माध्यम होता है. अमेरिका का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को 2026 के दौर की झलक दिखाने के साथ-साथ यह भी बताएगा कि उस समय दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ रही थी.
