टीएनपी डेस्क(TNP DESK): - 3 मई को विश्व प्रेस दिवस मनाया जाता है. पूरे विश्व में इस मौके पर कार्यक्रम का आयोजन होता है. प्रेस की स्वतंत्रता पर परिचर्चा आयोजित होती है. वर्तमान समय में प्रेस यानी पत्रकारिता से जुड़ी विधा पर चर्चा होती है. कई तरह की चिंताएं सामने आती हैं.
प्रेस की स्वतंत्रता जरूरी
प्रेस की स्वतंत्रता के लिए विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के विचार अक्सर आते रहते हैं. कमोवेश सभी लोग यह मानते हैं कि प्रेस की स्वतंत्रता बनी रहे ताकि निरंकुश शासन व्यवस्था पर एक दबाव और आम लोगों की समस्याओं का निस्तारण हो सके. कई बार ऐसा देखा जाता है कि प्रेस संबंधित शासन व्यवस्था से प्रभावित होकर अपनी मुखरता खो देते हैं. सरकारी तंत्र से विज्ञापन के माध्यम से आर्थिक लाभ की चाहत में पत्रकारिता की दशा और दिशा प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती है. पत्रकारिता जगत से जुड़े लोग और अन्य बुद्धिजीवी वर्ग के प्रतिनिधि मानते हैं कि यह प्रवृत्ति अच्छी नहीं है. प्रेस को स्वतंत्र तरीके से काम करना चाहिए.
2022 में विश्व में 67 पत्रकारों की मौत हमले की वजह से हुई
भारत समेत पूरे विश्व में पत्रकारिता से जुड़े लोगों पर हमले बढ़े हैं. यह चिंता की बात है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रेस की स्वतंत्रता की वकालत की है और इस बात पर चिंता जाहिर की है कि विश्व के कई हिस्सों में पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं. कुछ देशों में पत्रकारों को स्वतंत्र तरीके से काम करने से रोका जाता है या फिर उन्हें सजा दी जाती है. एक अधिकृत आंकड़े के अनुसार साल 2022 में विश्व में 67 पत्रकारों की मौत हमले की वजह से हुई है.
इन सभी ने प्रेस दिवस की दी शुभकामना
विश्व प्रेस दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों को बधाई और शुभकामना दी है. विभिन्न राजनीतिक दल के प्रमुखों ने भी प्रेस मीडिया से जुड़े लोगों को प्रेस दिवस पर शुभकामना प्रेषित की है.


