नर्मदेश्वर शिवलिंग पर पूजा करना क्यों है खास,जानिए इसकी विशेषता

    नर्मदेश्वर शिवलिंग पर पूजा करना क्यों है खास,जानिए इसकी विशेषता

    रांची(RANCHI): झारखंड में कई ऐसे तीर्थ स्थल है जो पूरे देश में एक अलग धर्मिक महत्व रखते है. ऐसा ही एक मंदिर राजधानी रांची के चुटिया में मौजूद है. चुटिया में सुरेश्वर महादेव का विशाल मंदिर है.मंदिर में नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित है,यहां पूजा करने का एक इस मंदिर में हर दिन हजारों लोग पहुंच कर शिव भगवान को जल चढ़ाते है.सावन में तो भक्तों का तांता लगा रहता है.देर रात से ही भक्त मंदिर में पहुंच जाते है. यहां आने वाले भक्तों का मानना है मंदिर में आने के बाद एक अलग सा सुकून मिलता है.

    सुरेश्वर महादेव मंदिर में 108 फ़ीट ऊची शिवलिंग है.यह देश में सबसे ऊंचे शिवलिंग में सुमार करता है.मंदिर के गेट पर पीतल से 12 ज्योतिर्लिंगों को दर्शाया गया है.ज्योतिर्लिंग से मंदिर में एक अलग सा दृश्य देखने को मिलता है.यहां आने वाले लोग एक साथ सभी ज्योतिर्लिंग का दर्शन भी कर लेते है.इस मंदिर में जो शिवलिंग मौजूद है.यह नर्मदेश्वर शिवलिंग है.

    नर्मदेश्वर शिवलिंग की विशेषता

    नर्मदेश्वर शिवलिंग पर जल चढ़ाने का एक विशेष महत्व है.जल चढ़ाने के बाद हर किसी की  मनोकामना पूरी होती है.बताया जाता है कि नर्मदेश्वर नदी से बने शिवलिंग और नदी के कण कण में  शिव होते है.सभी शिवलिंग के मुकाबले यह सबसे अलग माना जाता है.यही कारण है कि यहां पूजा अर्चना करने वालों में अलग सा उत्साह दिखता है.मंदिर में आने के बाद शान्ति मिलती है.मन हल्का होता है दुनिया की सभी बातें मंदिर में आने के बाद खत्म हो जाती है.नर्मदा पुराण की माने तो नर्मदा शिव की पुत्री है.नर्मदा को भगवान शंकर का वरदान प्राप्त है.नामर्द शिवलिंग सबसे पवित्र माना जाता है.

    नर्मदा नदी के कण कण में शिव मौजूद होते है.और ऐसी मान्यता है कि नर्मदा नदी में स्नान करना गंगा नदी जैसा ही फल प्राप्त होता है.अमरकंटक पर्वत से नर्मदा नदी बहती है, जहां से नदी के पानी में साथ बहकर पत्थर आते है. इन्हीं पत्थर रूपी शिव के अंश को बाणलिंग या narmada lingam के नाम से लोग जानते है

    घर पर कैसे करें नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा

    सबसे पहले सुबह उठने के बाद स्नान कर शिवलिंग को किसी थाल में रख कर शिव जी की प्रतिमा के सामने रखें.इसके बाद बेलपत्र और नैवेद्य शिव जी पर चढ़ाए.बाद में भगवान शिव कोजल चढ़ाएं.जल अर्पित करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करें और ॐ नम: शिवायः का जाप करते रहे. इसके साथ लिंगाष्टक स्तोत्रम् का पाठ करना भी बेहतर माना जाता है.


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