टीएनपी डेस्क(TNP DESK): रेलवे बोर्ड की नई अध्यक्ष जया वर्मा सिन्हा के बारे में जानना जरूरी है. रेलवे के 105 वर्ष के इतिहास में वह पहली महिला हैं जिन्हें यह बड़ा दायित्व मिला है. जया वर्मा तेज अखिल भारतीय सेवा की रेलवे सेवा से जुड़ी अधिकारी रही हैं.
जया वर्मा सिन्हा हाल में क्यों चर्चा में आईं
रेलवे बोर्ड का अध्यक्ष बनना कोई साधारण सी बात नहीं. अच्छा सर्विस करियर के अलावे परफॉर्मेंस भी देखा जाता है.भारत सरकार की नियुक्ति संबंधी विशेष कमेटी ने जया वर्मा सिन्हा की नियुक्ति पर मोहर लगाई. संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा के तहत IRTS सेवा में 1988 में उनका चयन हुआ. कानपुर सेंट्रल में उन्होंने अपना योगदान दिया. सियालदह में भी रेलवे डिवीजन में डीआरएम का दायित्व निभाया. बांग्लादेश में भारतीय हाई कमीशन में उन्होंने रेलवे के सलाहकार के रूप में काम किया. मैत्री रेल सेवा शुरू करने में उनकी बड़ी भूमिका रही. हाल में ओडिशा में बालासोर ट्रेन हादसे में उन्होंने बहुत बढ़िया काम किया. दुर्घटना से संबंधित तथ्यों को प्रेस में बहुत बेहतर तरीके से उन्होंने रखा.यहां तक कि प्रधानमंत्री के समक्ष रेलवे की ओर से इस दुर्घटना के संबंध में प्रेजेंटेशन भी उनके नेतृत्व में दिया गया. अनिल कुमार लाहोटी की जगह उन्हें नियुक्त किया गया है. अध्यक्ष बनने से पहले वह रेलवे बोर्ड में सदस्य संचालक और व्यवसाय के पद पर काम की हैं.
कहां की रहने वाली हैं जय वर्मा सिन्हा
जय वर्मा प्रयागराज की रहने वाली है.यहां से उन्होंने शिक्षा- दीक्षा ग्रहण की.इनके पिता वीबी वर्मा महालेखाकार कार्यालय में अफसर थे. बचपन से ही जय वर्मा मेधावी छात्रा रहीं. 1988 में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा के तहत उन्होंने रेलवे में एलाईड सर्विसेज में ग्रेड वन की सेवा पाई.
रेलवे को मिला है सबसे बड़ा आवंटन
भारत सरकार ने रेलवे को अब भारत तक का सबसे बड़ा आवंटन दिया है. यह जय वर्मा के लिए एक चुनौती भी है और एक बड़ा अवसर भी कि रेलवे में संसाधन और आधारभूत संरचना के विकास को और मजबूत कर सकें.ट्रांसपोर्ट सेक्टर में यह सबसे बड़ा 2.74 लाख करोड़ रुपए का आवंटन रहा है.


