धनबाद (DHANBAD): धनबाद के इस बाहुबली को लगभग डेढ़ दशक से पुलिस खोज रही है, लेकिन वह पुलिस के हाथ लग नहीं रहा है. इतना ही नहीं फरारी के दौरान उस पर झरिया में फायरिंग करने का आरोप लगा. यह आरोप 2025 के जनवरी महीने में लगा था. एफआईआर झरिया विधायक रागिनी सिंह ने कराया था. आरोप लगाया था कि उनके झरिया स्थित कार्यालय पर शशि सिंह और उसके साथी नवीन सिंह ने फायरिंग की है. दरअसल, 7 दिसंबर 2011 को धनबाद के चर्चित धनबाद क्लब में एक रिसेप्शन पार्टी चल रही थी. इस रिसेप्शन पार्टी में चर्चित कोयला कारोबारी सुरेश सिंह की हत्या कर दी जाती है. हत्या का आरोप बलिया के पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रामधीर सिंह के बेटे शशि सिंह पर लगता है.
शशि सिंह अपने लोगों के साथ पजेरो गाडी से पंहुचा था
बताया गया था कि शशि सिंह अपने लोगो के साथ पजेरो गाडी से धनबाद क्लब पंहुचा था. हत्या के बाद उसी गाडी से फरार हो गया. रामधीर सिंह अभी विनोद सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे है. शशि सिंह को ही सुरेश सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी बनाया गया. हत्याकांड के बाद से ही शशि सिंह फरार चल रहा है और इसी फरारी के दौरान ही 2025 के जनवरी महीने में झरिया में फायरिंग करने का आरोप लगा था. 7 दिसंबर 2011 को धनबाद क्लब में एक कोयला कारोबारी के बेटे की रिसेप्शन पार्टी चल रही थी.
धनबाद क्लब के रिसेप्शन पार्टी में सुरेश सिंह पहुंचे थे
लोग बताते हैं कि उस पार्टी में सुरेश सिंह भी पहुंचे हुए थे. शशि सिंह भी पहुंचा हुआ था. इसके बाद आरोप के मुताबिक शशि सिंह ने सुरेश सिंह की ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी. सुरेश सिंह के साथ भारी भरकम सुरक्षा दस्ता चलता था, लेकिन इन सब से बेखबर शशि सिंह ने सुरेश सिंह को गोली मार दी. उसके बाद फरार हो गया. उसके बाद से ही पुलिस उसे ढूंढ रही है, लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चल रहा है. इधर, धनबाद पुलिस ने शशि सिंह के "पृथ्वी मेन्शन" में छापेमारी की है. पुलिस को सूचना थी कि शशि सिंह धनबाद में देखा गया है. इसी सूचना के आलोक में "पृथ्वी मेन्शन" में छापेमारी की गई. चप्पे-चप्पे को खंगाला गया. लेकिन शशि सिंह हाथ नहीं आया. पुलिस पूरी तैयारी के साथ "पृथ्वी मेंशन" पहुंची थी. इस बीच यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस ने फरार वारंटियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया था और इसी अभियान के तहत धनबाद पुलिस "पृथ्वी मेंशन" भी पहुंची थी. सुरेश सिंह की हत्या के बाद कोयलांचल से लेकर उत्तर प्रदेश तक तहलका मच गया था. सुरेश सिंह को रेलवे रैक से कोयला सप्लाई का "किंग" माना जाता था.
सुरेश सिंह को क्यों कहा जाता था "कोयला किंग"
दरअसल, सुरेश सिंह को "कोयला किंग" इसी तरह नहीं कहा जाता था. धनबाद के कोयला कारोबार पर सुरेश सिंह का दबदबा था. झरिया के कतरास मोड़ का एक साधारण सा युवक कोयला का इतना बड़ा कारोबारी कैसे बन गया, इसको लेकर कई तरह की बातें कहीं जाती हैं. लोग बताते हैं कि कोयला कारोबार में उस समय एक तिकड़ी काम करती थी. उस तिकड़ी में सुरेश सिंह, संजय सिंह सहित अन्य शामिल थे. संजय सिंह की बाद में हत्या हो गई. उसके बाद तिकड़ी बिखर गई, लेकिन सुरेश सिंह ने कोयले का कारोबार जारी रखा और इस धंधे में आगे बढ़ते चले गए. राजनीति में भी सुरेश सिंह ने किस्मत अजमाया था. झरिया से कांग्रेस के टिकट पर दो बार चुनाव भी लड़ा लेकिन वह विधायक नहीं बन सके. इस बीच 2011 में उनकी सनसनीखेज हत्या हो गई.


