कौन था देश का सबसे खतरनाक माड़वी हिडमा,जिसके पीछे पड़े थे 10 हजार जवान,अब इस तरह से घेर कर जवानों ने कर दिया ढेर  

    कौन था देश का सबसे खतरनाक माड़वी हिडमा,जिसके पीछे पड़े थे 10 हजार जवान,अब इस तरह से घेर कर जवानों ने कर दिया ढेर  

    TNPDESK: देश में नक्सलवाद का अगर नाम आता है तो सबसे पहले तस्वीर छत्तीसगढ़ की सामने आती है. साथ ही जब माओवादी का जिक्र होता है तो इसमें माड़वी हिडमा सबसे ऊपर दिखेगा. देश के सबसे टॉप माओवादियों की लिस्ट में हिडमा सबसे ऊपर माना जाता है.इसके पीछे की वजह साफ है हिडमा घातक वार करता है. और पल भर में बड़ी चोट पहुंचा कर फरार हो जाता. यही वजह है कि 20 साल के बाद इसकी एक तस्वीर सामने आई थी. यह सबसे कम उम्र का सेंट्रल कमिटी सदस्य भी नियुक्त किया गया.    

    माड़वी हिड़मा सबसे खूंखार और वांटेड नक्सली कमांडरों में से एक था.  CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 का कमांडर था.  उसका जन्म 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूवर्ती (Puvarti) गांव में हुआ था.  वह मुड़िया जनजाति से था और 1990 के दशक में महज 15-17 साल की उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ गया था. इसके बाद से यह कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा लेकिन अब मंगलवार की सुबह इसका खात्मा हो गया. माड़वी हमेशा के लिए मौत की नींद सो गया.  

    हिडमा कई नामों ने जाना जाता था इसके साथी इसे संतोष, हिडमालू, हिडमन्ना नाम से भी बुलाते थे. हिडमा  26 बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था, जिनमें सैकड़ों सुरक्षा बलों के जवान और नागरिक मारे गए.  

     2010 दंतेवाड़ा हमला (76 CRPF जवान शहीद)

     2013 झीरम घाटी हमला (कांग्रेस नेताओं सहित 27-32 लोग मारे गए)

    2017 सुकमा हमला (25 CRPF जवान शहीद

     2021 सुकमा-बीजापुर हमला (22 जवान शहीद)

    • इनाम: उसके सिर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था.
    • सुरक्षा: वह हमेशा 200-300 हथियारबंद नक्सलियों के घेरे में रहता था और घने जंगलों (बस्तर, आंध्र-छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर) में छिपा रहता था.

    18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों (ग्रेहाउंड फोर्स) के साथ मुठभेड़ में माड़वी हिड़मा मारा गया.  इस एनकाउंटर में कुल 6 नक्सली मारे गए, जिनमें हिड़मा की पत्नी राजे (उर्फ राजक्का) भी शामिल बताई जा रही है।  यह नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है. हिड़मा की मौत से बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है.  पहले कई बार अफवाहें उड़ी थीं कि वह मारा गया, लेकिन इस बार शव की पहचान और हथियार बरामदगी से पुष्टि हो गई है.


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