सुप्रीम लीडर खामेनई कौन थे,भारत से क्या है रिश्ता,यूपी में सड़क पर रोने वाले लोग कौन


TNPDESK: अमेरिका-इजरायल का ईरान के साथ युद्ध जारी है. इस युद्ध में ईरान को एक बड़ा झटका लगा है. ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनई के साथ कई टॉप लीडर की मौत हो गई. इनके मौत की खबर के बाद अब ईरान के साथ साथ भारत के कई हिस्से में भी अमेरिका का विरोध देखने को मिला.ऐसे में इस रिपोर्ट में बात करेंगे की खामेनई कौन थे और भारत से इनका रिश्ता क्या है. यूपी में क्यों मातम जैसा माहौल बन गया.
एक साथ आठ देश पर हमला
सबसे पहले यह जान लेते है कि युद्ध कैसे शुरू हुआ. पूरी कहानी क्या है.अमेरिका और इसरायल के साथ ईरान की कई महीनों से टेंशन बनी थी. इसी बीच शनिवार को सुबह 11 बजे अचानक ईरान के कई शहरों पर हमला हुआ. जिसमें तेहरान से लेकर सुप्रीम लीडर के आवास को निशाना बनाया गया.जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की. जिसमें मध्य पूर्व के आठ देशों पर हमला बोल दिया. सऊदी अरब,दुबई,जोर्डन,बहरीन,कुवैत,कतर इराक में मौजूद अमेरिकी बेस को टारगेट किया. जिसमें बड़ा नुकसान पहुंचा. इस वार के बाद टेंशन और बढ़ गई.
ईरान का जवाब शुरू तुमने किया खत्म हम करेंगे
अमेरिका की ओर से इस घटना के बाद ट्रम्प का बयान सामने आया. जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान को एटोमिक पवार नहीं बनने देंगे. ईरान को जवाब दिया जाएगा.जिसके बाद फिर ईरान ने बयान जारी किया कि शुरू उन्होंने किया है और खत्म हम करेंगे. वह डट कर लड़ने की हुंकार भरी.
देर रात खामेनई समेत कई की गई जान
लेकिन देर रात फिर इसरायल-अमेरिका की ओर से हमला किया गया. जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई समेत उनके बेटे दामाद और परिवार के कई लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई. इनके मौत के बाद अब कई देश में बवाल और बढ़ गया. भारत में भी प्रदर्शन देखने को मिला. यूपी के लखनऊ में लोग सड़क पर रो रहे थे. और अमेरिका का विरोध में नारेबाजी की गई.
लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन
यूपी के लखनऊ में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर महिलाओं ने प्रदर्शन किया.जिसमें शिया समुदाय की बड़ी संख्या में महिला सड़क पर रोने लगी और अमेरिका के खिलाफ आवाज बुलंद किया. प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि उन्हे धोखे से मारा गया है. वह शेर थे और रहेंगे. एक खामेनई मरेगा हजार जन्म लेगा.
कौन है खामेनई
1979 के इस्लामिक क्रांति के जनक अयातुल्ला रूहोंलल्लाह खुमैनी की जगह अली खामेनेई को मिली थी. सुप्रीम लीडर से पहले वह 1980-88 के समय वह उप रक्षा मंत्री बने और सुरक्षा बल के जवानों के करीब आए. इस बीच 1981 में तेहरान की अबूजर मस्जिद में टेप रीकॉर्डर में विस्फोटक हुआ.जिसमें उनके हाथ लकवा ग्रस्त हो गए थे साथ ही कान से कम सुनाई देने लगा था. इसके बाद वह ईरान के लोगों की नजरों में अलग क्रांति के जीवित शाहिद बन गए.इस घटना के कुछ महीनों के बाद रूहुल्लाह के समर्थन से वह ईरान के राष्ट्रपति बन गए. अयातुल्ला रूहोंलल्लाह खुमैनी के निधन के बाद 1989 में खामेनई को सुप्रीम लीडर चुना गया.
भारत से क्या है कनेक्शन
अब आज फिर चर्चा शुरू हो गई की इनका भारत से क्या कनेक्शन है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अली खामेनई के गुरु अयातुल्ला रूहोंलल्लाह खुमैनी का बाराबंकी यूपी से गहरा लगाव रहा है. वह उत्तरप्रदेश के ही रहने वाले थे. खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसावी का जन्म उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले के किंतुर गाँव में हुआ था. यह परिवार 18 वीं सदी में ईरान से ही भारत पहुंचा था. माना जाता है यहाँ शिया धर्म का प्रचार प्रसार करने उनका परिवार भारत आया था. और भारत में ही रह गए. लेकिन उनके बेटे खुमैनी वापस ईरान लौटे थे. जिसके बाद से ईरान की राजनीत में सक्रिय थे.
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