माओवादियों का सबसे बड़ा नेता गणपति कौन जिसे 50 साल से खोज रहे थी देश की पुलिस

    माओवादियों का सबसे बड़ा नेता गणपति कौन जिसे 50 साल से खोज रहे थी देश की पुलिस
    देश में पांच दशकों से अंडर ग्राउंड रहने के बाद बा सबसे कुख्यात और सबसे बड़ा नक्सली हथियार डालने वाला है.यह इतना खतरनाक है कि बीते 40 साल से इसकी कोई तस्वीर तक सामने नहीं आई. आज सवाल है कि कौन है गणपति और शिक्षक से नक्सली बनने की कहानी क्या है.आखिर में अब चार दशक के बाद आत्म समर्पण करने की चर्चा क्यों शुरू हो गयी.

    TNPDESK:देश में पांच दशकों से अंडर ग्राउंड रहने के बाद बा सबसे कुख्यात और सबसे बड़ा नक्सली हथियार डालने वाला है.यह इतना खतरनाक है कि बीते 40 साल से इसकी कोई तस्वीर तक सामने नहीं आई. आज सवाल है कि कौन है गणपति और शिक्षक से नक्सली बनने की कहानी क्या है.आखिर में अब चार दशक के बाद आत्म समर्पण करने की चर्चा क्यों शुरू हो गयी.

    सबसे पहले देखे तो भारत में नक्सलियों के खात्मे की अंतिम तारीख 31 मार्च 2026 रखी गयी है.इस डेडलाइन के तहत महज अब २५ दिन का समय सुरक्षा बल के जवानो के पास बचा है.  जिस वजह से छत्तीसगढ़ से लेकर झारखण्ड और तेलंगाना में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान में सुरक्षा बल के जवानो के निशाने पर बड़े नक्सली कमांडर है.

    इनमें टॉप पर गणपति का नाम आता है.मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ़ गणपति की तलाश सुरक्षा एजेंसी और सुरक्षा बल के जवान कई दशक से कर रहे है.लेकिन इसकी एक तस्वीर तक सामने नहीं आई.लेकिन इस बिच चर्चा शुरू हुई की गणपति अब हथियार डाल कर मुख्य धारा में लौट सकते है.सूत्रों के मुताबिक वह सीनियर पुलिस अधिकारियो के संपर्क में है.     

    सम्भवना है कि तेलंगाना पुलिस के सामने वह सरेंडर कर मुख्यधारा में लौट  सकते है. हालांकि अब तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है.लेकिन जब चर्चा गणपति जैसे बड़े माओवादी नेता की हो रही है.तो सम्भवना है कि 24 घंटे में वह सरेंडर कर सकते है.

    गणपति की उम्र करीब 77 साल है सुरक्षा एजेंसी से वह 50 साल से बच कर निकल रहा है.कई बार बड़े अभियान गणपति को पकड़ने के लिए चलाये गए लेकिन वह हर बार भाग कर निकल जाता।हमेश पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा.गणपति कहा रहता था कहा जाता वह उसकी किसी को जानकारी नहीं मिलती।यही वजह है कि 40 साल से उसकी कोई तस्वीर तक सामने नहीं आई है.वह कैसा दीखता है यह भी किसी सुरक्षा बल के जवान या एजेंसी को जानकारी नहीं है.

    कौन है गणपति

    गणपति को माओवादियों का भीष्मपितामह माना जाता है.मूल रूप से आँध्रप्रदेश के करीमनगर जिले के गांव में उनका जन्म 1948 में हुआ.शुरुआत से शोषण और अत्याचार के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते थे.साथ ही पढ़ने लिखने में भी वह तेज तरर्रा थे.अच्छी पढ़ाई के बाद वह शिक्षक बन गए और अब दुसरो को शिक्षकित करने का काम करने लगे.

    लेकिन कुछ दिन बाद नक्सलबाड़ी आंदोलन देश में सक्रीय हुआ.इस बिच गणपति ने भी नौकरी छोड़ी और वह वारंगल चले गए.वहां नक्सल आंदोलन नजदीक से देखा।और इस आंदोलन से वह प्रभावित हुए.इसी जगह pwg पीपुल्स वार ग्रुप के संस्थापक कोंडापल्ली सीता रमैया से उनकी मुलाकात हुई.धीरे धीरे नजदीकी बढ़ी और वह संगठन में शामिल हो गए.

    इसके बाद साल 1993 -94 में उन्हें PWG का महासचिव बना दिया गया.संगठन क्षमता के साथ साथ रणनीति और विजन देख कर इन्हे जिम्मेवारी दी गयी.

    माना जाता है कि 1993 से 2015 तक देश में जितनी भी बड़ी नक्सल घटना हुई उसमें रणनीतिकार गणपति रहा है.गणपति के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में सामने आया था.इस बिच 2004 में सीपीआई माओवादी का गठन हुआ.  और इसमें MCC और PWG का विलय कर दिया गया.इस विलय के बाद गणपति को नव गठित संगठन का पहला महासचिव चुना गया.

    इसमें 2017 -18 में माओवादियों की बैठक में महासचिव के पद पर बसवा राजू को नियुक्त किया गया.जबकि गणपति को मार्गदशन मंडल में डाला दिया गया.

    इनके आतंक को देखते हुए 3.5 करोड़ का इनाम रखा है.ज़िंदा या मुर्दा पड्कने का आदेश जवानो को दिया गया था.तेलंगाना,छत्तीसगढ़ आंध्रप्रदेश समेत अन्य राज्य में इनके खिलाफ सैकड़ो मुकदमें दर्ज है.    

    लेकिन अब 05 मार्च 2026 को गणपति के सरेंडर की खबर सामने आई है.


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