मेरे पैसे कब वापस करोगे यार ! उधार दिया पैसा इतने महीनों में नहीं मिला रिटर्न तो भूल जाइए, पढ़े क्या कहता है कानून

    मेरे पैसे कब वापस करोगे यार ! उधार दिया पैसा इतने महीनों में नहीं मिला रिटर्न तो भूल जाइए, पढ़े क्या कहता है कानून

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):पैसे उधार लेना और देना हमारे जीवन का अहम हिस्सा है जब भी हमें जरूरत पड़ती है तो हम अपने दोस्त, रिश्तेदारों या अन्य किसी से पैसे उधार लेते है.वही कई बार हम अपने दोस्तों को जरूरत पड़ने पर उधार देते भी हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग उधार लेकर भूल जाते है आप अपने पैसे के लिए अगले  आदमी के आगे हाथ फैलाते है लेकिन वह बस यहीं कह कर टाल देता है कि दे दूंगा, कर दूंगा.ऐसी स्थिति में हम सभी फंस जाते है. जहां ना तो पैसे मांगने में बनता है और ना ही छोड़ने में.बार-बार बेशर्म की तरह अपने पैसे  मांगते जब हम थक जाते हैं तो मांगना ही छोड़ देते है और हमारे पैसे डूब जाते है.

    उधार दिए पैसे कितने दिनों के अंदर वापस ले सकते है

    इतने दिन हो गए अब तक पैसे वापस नहीं किए है. एक महीने में लौटाने की बात कही थी पर अब तक…बोलने के बाद भी जब अगला इंसान कोई जवाब नहीं देता है हम पैसे मांगना ही बंद कर देते है.अगर बार-बार हम पैसे मांगते भी हैं तो अगला इंसान नाराज हो जाता है, जिसके बाद हम चुप हो जाते है.ऐसे में आज हम आपको बताने वाले है कि आप अपने उधार दिए पैसे कितने दिनों के अंदर वापस ले सकते है और इसे लेकर भारतीय कानून क्या कहता है.

    पढ़े क्या कहता है कानून

    भारतीय कानून के अनुसार अगर आप किसी को पैसे वापस देते है तो मांगने का अधिकार केवल 3 साल तक का ही होता है. अगर 3 साल से ज्यादा हो गया तो आप पैसे वापस नहीं ले सकते.यदि आप कोर्ट में केस दर्ज भी करते है तो कोर्ट आपके पैसे वापस नहीं ले सकता क्योंकि आपने कानून की ओर  से तय सीमा के अंदर केस दर्ज नहीं करवाया इसलिए आप लापरवाही के पात्र है.कोर्ट  लापरवाह लोगों के पैसे वापस दिलाने का जिम्मा नहीं लेता है.

    इतने दिनों के अंदर ही कोर्ट में करना पड़ता है मुकदमा

    उधार दिए गए पैसे मांगने के मामलों में Limitation Act 1963 काम करता है.इस एक्ट की धारा-3 में ये साफ़ कहा गया है कि यदि कोई वाद, अपील या आवेदन निर्धारित समय की समाप्ति के बाद कोर्ट के समक्ष लाया जाता है तो कोर्ट ऐसे वाद, अपील या आवेदन को समय बीत जाने के कारण खारिज कर देगा.कोर्ट का ऐसा करने के पीछे एक ही मकसद है कि किसी भी काम को तय सीमा के अंदर निपटाया जा सके और मुक़दमे बाजी का अंत हो जाए.

    पढ़े कोर्ट किन लोगों की करता है मदद

    Limitation Act 1963 ऐसे लोगों की मदद करता है जो अपने अधिकारों के प्रति सजग है ना कि वैसे लोग जो अपने अधिकारों को लेकर लापरवाही दिखाते है.कानून के मुताबिक अगर कोई अपने अधिकार के प्रति जागरूक होगा तो वह 3 साल के भीतर ही मुक़दमा दर्ज करेगा ना कि इसके बाद.यदि आपसे भी किसी ने उधार लिया है और नहीं लौटा रहा है तो 3 साल होने से पहले ही कोर्ट में जाकर मुक़दमा दर्ज करवाएं और अपने पैसे कानूनी रूप से वापस ले सकते है.


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