जब पांच साल की मासूम बेटी ने पिता को दी मुखाग्नि, छलक पड़े सभी के आंसू

    कुदरत भी कभी-कभी इंसान के साथ ऐसा खेल खेलता है कि लोग उसे समझ नहीं पाते. इसके बाद इंसान नियति को कोसकर खामोश जुबां से सबकुछ सह जाता है. कुछ इसी तरह का मामला रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के कोराम्बे गांव में हुआ.

    जब पांच साल की मासूम बेटी ने पिता को दी मुखाग्नि, छलक पड़े सभी के आंसू

    रामगढ़ (RAMGARH) : कुदरत भी कभी-कभी इंसान के साथ ऐसा खेल खेलता है कि लोग उसे समझ नहीं पाते. इसके बाद इंसान नियति को कोसकर खामोश जुबां से सबकुछ सह जाता है. कुछ इसी तरह का मामला रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के कोराम्बे गांव में हुआ. यहां जब एक पांच साल की मासूम बेटी के छोटे-छोटे हाथ पिता को मुखाग्नि देने के लिए बढ़ी तो वहां मौजूद बड़े से बड़े कठोर दिल वाला इंसान रो पड़ा.

    आपको बता दें कि गोला प्रखंड के कोराम्बे गांव निवासी अजीत कुमार की हत्या सोनाहातू स्थित ससुराल जाने के दौरान किसी ने कर दी. पोस्टमार्टम के बाद अजीत कुमार का शव परिजनों को सौंपा गया. अजीत की शादी करीब छह-सात पहले सोनाहातू में हुई थी. उनकी एक पांच साल की बेटी है. बेटा नहीं होने के कारण लोगों ने यह फैसला लिया कि पिता को मुखाग्नि देने का अधिकार उसके संतान को ही होता है. इसलिए अजीत की बेटी ही पिता को मुखाग्नि देगी.

    श्मशान घाट में चिता पर लेटे पिता को जब पांच साल की डॉली के हाथ मुखाग्नि देने के लिए बढ़े तो वहां मौजूद लोगों का कलेजा फट उठा. सभी यही कह रहे थे काश ऐसा दिन किसी को नहीं दिखाना. इस दौरान मृतक का भतीजा मनीष कुमार सात वर्ष भी शामिल था. यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई. यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस दौरान समाज के लोगों ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि पुत्र ही सब कुछ नहीं होता है. वर्तमान समय में बेटे से बढ़कर बेटियां ही अपना फर्ज निभाती हैं.

     

     

     


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