वेस्ट एशिया में जंग, शेयर बाजार गिरा, घबराएं नहीं अपनाएं ये स्मार्ट रणनीति!


टीएनपी डेस्क(TNP DESK): पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात का असर भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत दिखाई दिया. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार गिरावट दर्ज की गई. शुरुआती मिनटों में ही निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 7.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आंकी गई. वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों ने निवेशकों के मनोबल को कमजोर कर दिया, जिसके चलते बाजार में चौतरफा बिकवाली हावी रही.
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की जड़ पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य टकराव है. अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए कथित हमलों तथा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी. इस प्रकार की घटनाएं वैश्विक निवेश माहौल को अस्थिर कर देती हैं, क्योंकि युद्ध की आशंका से व्यापार, आपूर्ति शृंखलाएं और ऊर्जा बाजार प्रभावित होते हैं. परिणामस्वरूप निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं.
हालात तब और पेचीदा हो गए जब ईरान ने जवाबी कार्रवाई की. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा. फिलहाल निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल है और वे बड़ी निवेश प्रतिबद्धताओं से बच रहे हैं.
ऊर्जा क्षेत्र में भी तनाव का असर साफ दिखा. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज हुआ और ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया. सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है. यदि वहां किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है. भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इससे ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.
बाजार में अस्थिरता बढ़ने के साथ ही सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश साधनों की मांग तेज हो गई. निवेशकों ने शेयरों से धन निकालकर कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाया, जिससे इनके दामों में तेजी आई. दूसरी ओर, रिलायंस, एलएंडटी और अदानी पोर्ट्स जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. समग्र रूप से देखा जाए तो मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया है और आगे की चाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी.
4+