टारगेट पर देश के तीन खतरनाक नक्सली! जंगल में शुरू हुआ बड़ा अभियान,जानिए कौन है सबसे कुख्यात नक्सली
.jpg)
.jpg)
रांची(RANCHI): नक्सलवाद के खात्मे का काउन्ट डाउन शुरू हो गया.झारखंड के सारंडा से लेकर छत्तीसगढ़ के बस्तर तक एक बड़े अभियान की शुरुआत की गई. जिसमें जवानों के टारगेट पर देश के टॉप 3 नक्सली है.जिनके खात्मे के बाद नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.सुरक्षा बल के जवानों को गृह मंत्रालय से टारगेट पर सीधा वार करने का आदेश मिला है. जिसे 31 मार्च 2026 से पहले तय करना है. ऐसे में सेंट्रल फोर्सेस की गतिविधि जंगल में और भी तेज हो गई.
इसमें सबसे पहले बात झारखंड के सारंडा की कर लेते है. सारंडा फिलहाल नक्सलियों का मुख्यालय है. इसी जंगल में करीब 65 नक्सली है. इनमें सबसे खतरनाक ERB सचिव-सीसी मिसिर बेसरा भी शामिल है. जिसे टारगेट करने की तैयारी में जवान है. माना जाता है कि बेसरा सबसे खतरनाक नक्सली में एक है. MA तक पढ़ा लिखा बेसरा की उम्र करीब 60 साल है. लेकिन नक्सल गतिविधि को बड़े पैमाने पर अभी भी अंजाम देता है. जिसे जवान अब खोज रहे है.इसे आतंक को देख कर पुलिस मुख्यालय ने एक करोड़ का इनाम घोषित कर रखा है.
दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ के गणपति का नाम आता है. गणपति कई नामों से जाना जाता है. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति भी कहते है. माओवादियों में पोलित ब्योरों का प्रमुख के साथ सेंट्रल कमिटी का एडवाइजर है. संगठन में इसकी सलाह बेहद अहम मानी जाती है. कई बड़े हमलों का मास्टर माइंड भी इसे माना जाता है. करीब चार दशक से नक्सल आंदोलन में जुड़ा है. गणपति मूल रूप से तेलंगना के करीमनगर जिले के सरंगपुर मंडल के वीरपुर गंध का रहने वाला है.
अब तीसरा नाम है देव उर्फ चैतन का है. जो सबसे ऊपर हिट लिस्ट में है. यह कई नाम से जाना जाता है. देवी उर्फ चिप्परी तिरूपति उर्फ रमेश उर्फ देव उर्फ कुम्मा उर्फ चैतन के नाम से इसके साथी इसे जानते है. 62 साल के करीब इसकी उम्र है. फिलहाल इसके कंधे पर बड़ी जिम्मेवारी है.पोलित ब्योरों का कमांडर और सेंट्रल कमिटी कमीशन का चीफ है. साथ ही सीपीआई माओवादी का महासचिव के पद पर बना है. हिडमा के मारे जाने के बाद माना जाता है कि सबसे खतरनाक नक्सली देव है.
मूल रूप से यह तेलंगाना का रहने वाला है. करीमनगर का देवनी नक्सलियों का गुरुजी भी माना जाता है. इसपर एक करोड़ का इनाम भी है. देश में कई बड़े नक्सल हमलों में इसका नाम सामने आया है. 100 से अधिक जवानों की शहादत का जिम्मेवार भी इसे माना जाता है. जवानों को पर हमले करने की साजिश रचने में बड़ा मास्टर माइंड है. फिलहाल अब सुरक्षा बल के जवान इसकी तलाश कर रहे है.
अब गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि 31 मार्च 2026 के नक्सलवाद का नामों निशान नहीं बचेगा. ऐसे में नक्सलियों की तलाश तेज कर दी गई. पुलिस मुख्यालय झारखंड के मुताबिक राज्य में अब महज 60 के करीब नक्सली बचे है. जो सारंडा के जगह में बैठे है. वहीं छत्तीसगढ़ पुलिस के मुताबिक 200 के करीब नक्सल अभी भी हथियार लेकर जंगल में बैठे है.
4+