टीएनपी डेस्क (TNP DESK): परीक्षा हमारे लाइफ का वह पहलू जो हर अभ्यर्थी के जीवन में आता है. पर क्या कभी आपने ये सोचा है कि आखिर यह एक्जाम कन्डक्ट कैसे होते हैं, इसके पीछे का पूरा सिस्टम क्या है? ऐसे में देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अक्सर यह सवाल उठते हैं कि पेपर कैसे तैयार होते हैं, परीक्षा का संचालन कैसे होता है और इसमें किन एजेंसियों की भूमिका होती है? इन सभी सवालों का जवाब है राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, जो देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करती है. ऐसे में अगर आप भी जानना चाहते हैं कि NTA, काम कैसे करता है तो यह खबर आपके बड़े काम की है.
कब और कैसे बना NTA?
NTA की घोषणा 2017 में केंद्रीय बजट के दौरान की गई थी. इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया गया. 7 जुलाई 2018 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने औपचारिक रूप से इसकी शुरुआत की. इसके पहले डायरेक्टर जनरल विनीत जोशी बने, जो 1992 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. एजेंसी को JEE Main, NEET UG, UGC NET, CMAT और GPAT जैसी बड़ी परीक्षाओं की जिम्मेदारी दी गई.
NTA का गठन सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में किया गया है. यानी यह कोई संवैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि एक सोसाइटी के रूप में कार्य करती है. इसके संचालन के लिए 10 सदस्यीय गवर्निंग बॉडी बनाई गई है, जिसमें चेयरपर्सन, मेंबर सेक्रेट्री और अन्य सदस्य शामिल होते हैं.
कैसे आयोजित होती हैं परीक्षाएं?
NTA परीक्षा आयोजन के लिए एक बड़ी प्रक्रिया अपनाता है, लेकिन इसका अधिकतर काम आउटसोर्स किया जाता है. प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के प्रोफेसरों को एक्सपर्ट के रूप में शामिल किया जाता है. परीक्षाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में आयोजित की जाती हैं.
ऑफलाइन परीक्षाओं के मामले में प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न बैंकों, जैसे State Bank of India और Canara Bank में रखा जाता है. परीक्षा से पहले संबंधित अधिकारियों को मैसेज के जरिए जानकारी दी जाती है कि प्रश्नपत्र किस बैंक से लेना है. कई बार अंतिम समय में यह जानकारी बदल भी जाती है. परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र बॉक्स में भेजे जाते हैं, जिन्हें ऑब्जर्वर, सेंटर कोऑर्डिनेटर और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में खोला जाता है. कुछ परीक्षाओं में सुरक्षा के लिए डबल लॉक सिस्टम भी लगाया जाता है, जिसमें मैनुअल और डिजिटल दोनों प्रकार के लॉक होते हैं.
क्यों है लीक का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, जहां नेटवर्क की समस्या होती है या जहां स्टोरेज की व्यवस्था कमजोर होती है, वहां पेपर लीक की आशंका बढ़ जाती है. प्रश्नपत्रों को बैंक से केंद्र तक ले जाने की प्रक्रिया में भी जोखिम बना रहता है, क्योंकि यह पूरी तरह मानवीय जिम्मेदारी पर निर्भर करता है. हालांकि, परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के लिए जैमर लगाए जाते हैं, ताकि किसी प्रकार की डिजिटल गड़बड़ी न हो सके. लेकिन कई बार ये जैमर सही तरीके से काम नहीं करते, जिससे सुरक्षा में सेंध लगने की आशंका रहती है.
NTA का लगभग पूरा काम आउटसोर्सिंग के जरिए होता है. परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, कंप्यूटर, CCTV, तकनीकी सहायता और स्टाफ की नियुक्ति, सब कुछ टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है. इसके लिए अलग-अलग कंपनियों को जिम्मेदारी दी जाती है. कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि परीक्षा के दौरान स्थानीय स्तर पर फैसले लेने पड़ते हैं और NTA सीधे निगरानी में नहीं होता. ऐसे में कई बार नियमों के पालन को लेकर विवाद भी खड़े हो जाते हैं.
NTA देश की बड़ी परीक्षाओं का जिम्मा संभालता है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह केंद्रीकृत नहीं है. आउटसोर्सिंग पर अधिक निर्भरता और कई स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप के कारण चुनौतियां बनी रहती हैं. ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कायम रह सके.

