TNP DESK : आज के दौर में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. पहले जहां ज्यादातर काम शारीरिक श्रम से जुड़े होते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग ऐसे काम कर रहे हैं जिनमें घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना पड़ता है. आईटी सेक्टर, मीडिया, बैंकिंग, कॉर्पोरेट ऑफिस, सरकारी दफ्तर और यहां तक कि घर से काम करने वाले पेशों में भी लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है.
काम भी हो बेहतर और सेहत भी रहे सुरक्षित
हालांकि यह काम देखने में आसान लगता है लेकिन लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करना सेहत के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है. डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सिटिंग वर्क को सही तरीके से नहीं किया जाए तो इससे कमर दर्द, गर्दन दर्द, मोटापा, आंखों की कमजोरी और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. इसी वजह से अब विशेषज्ञ यह सलाह दे रहे हैं कि लोग सिटिंग वर्क करते समय स्मार्ट तरीके अपनाएं ताकि काम भी बेहतर हो और सेहत भी सुरक्षित रहे.
तेजी से बढ़ा है सिटिंग वर्क का चलन
पिछले एक दशक में डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ सिटिंग वर्क का चलन तेजी से बढ़ा है. कंप्यूटर और इंटरनेट के कारण अब कई काम ऑनलाइन ही पूरे हो जाते हैं. ऑफिस में बैठकर फाइलों पर काम करना, कंप्यूटर पर डेटा तैयार करना, मीटिंग करना और मोबाइल के जरिए संवाद करना आज की कार्य संस्कृति का हिस्सा बन चुका है. खासकर महामारी के बाद वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था ने इस चलन को और मजबूत किया है. लाखों लोग अपने घरों में लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने बैठकर कई-कई घंटे काम कर रहे हैं. हालांकि इससे समय और संसाधनों की बचत होती है लेकिन लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
दिनचर्या में कुछ जरूरी बदलाव करने की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बैठकर काम करने से शरीर की मांसपेशियां कम सक्रिय हो जाती हैं. इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग दिन में 7 से 8 घंटे तक लगातार बैठकर काम करते हैं, उनमें कमर दर्द और गर्दन दर्द की समस्या आम हो जाती है। इसके अलावा लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सूखापन और सिरदर्द की शिकायत भी बढ़ सकती है. इसके साथ ही बैठकर काम करने वाले लोगों में मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा भी अधिक देखा गया है. यही वजह है कि विशेषज्ञ अब सिटिंग वर्क करने वाले लोगों को अपनी दिनचर्या में कुछ जरूरी बदलाव करने की सलाह दे रहे हैं.
सिटिंग वर्क करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात
सिटिंग वर्क करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात है सही तरीके से बैठना. गलत मुद्रा में बैठकर काम करने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ जाता है और इससे कमर व गर्दन में दर्द की समस्या हो सकती है.विशेषज्ञों का कहना है कि काम करते समय पीठ को सीधा रखकर बैठना चाहिए और कुर्सी की बैक का सहारा लेना चाहिए. कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के सामने होनी चाहिए ताकि गर्दन को झुकाकर काम न करना पड़े. इसके अलावा पैरों को जमीन पर सीधा टिकाकर बैठना भी जरूरी होता है. सही मुद्रा में बैठने से शरीर पर दबाव कम पड़ता है और लंबे समय तक काम करना भी आसान हो जाता है.
छोटे-छोटे ब्रेक लेने से बढ़ती है काम की क्षमता
सिटिंग वर्क करने वाले लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे लगातार कई घंटे तक बिना रुके काम न करें. विशेषज्ञों के अनुसार हर 30 से 40 मिनट के बाद कुछ मिनट का ब्रेक लेना चाहिए. इस दौरान व्यक्ति थोड़ा चल सकता है, खड़े होकर शरीर को स्ट्रेच कर सकता है या हल्की-फुल्की गतिविधि कर सकता है. इससे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों की जकड़न कम होती है. छोटे-छोटे ब्रेक लेने से काम की क्षमता भी बढ़ती है और थकान भी कम महसूस होती है.
बेहद फायदेमंद मानी जाती है स्ट्रेचिंग
लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए स्ट्रेचिंग बेहद फायदेमंद मानी जाती है. काम के बीच-बीच में गर्दन, कंधे, हाथ और पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करने से शरीर को आराम मिलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में कम से कम 20 से 30 मिनट तक शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए. सुबह या शाम की सैर, योग या हल्का व्यायाम शरीर को फिट रखने में मदद करता है. अगर व्यक्ति नियमित रूप से व्यायाम करता है तो सिटिंग वर्क के कारण होने वाली कई समस्याओं से बचा जा सकता है.
20-20-20 नियम अपनाने की सलाह
आज के दौर में ज्यादातर सिटिंग वर्क कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के जरिए होता है. ऐसे में आंखों पर लगातार दबाव पड़ता है. डॉक्टरों का कहना है कि स्क्रीन पर लगातार देखने से आंखों में थकान, जलन और सूखापन की समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी जाती है. इस नियम के अनुसार हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना चाहिए. इससे आंखों को आराम मिलता है और आंखों पर पड़ने वाला तनाव कम होता है.
पर्याप्त पानी के साथ संतुलित और पौष्टिक आहार जरूरी
सिटिंग वर्क करते समय लोग अक्सर पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है. इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है. इसके अलावा संतुलित और पौष्टिक आहार भी जरूरी होता है. जंक फूड और ज्यादा तैलीय भोजन से बचना चाहिए. फल, हरी सब्जियां और प्रोटीन युक्त आहार शरीर को ऊर्जा देते हैं और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखते हैं.
काम को स्मार्ट तरीके से करना बेहद जरूरी
सिर्फ लंबे समय तक काम करना ही सफलता की गारंटी नहीं है बल्कि काम को स्मार्ट तरीके से करना ज्यादा जरूरी होता है. स्मार्ट वर्क का मतलब है कि व्यक्ति अपने काम को व्यवस्थित तरीके से करे. दिन की शुरुआत में जरूरी कामों की सूची तैयार करना, समय का सही उपयोग करना और अनावश्यक गतिविधियों से बचना स्मार्ट वर्क का हिस्सा है. अगर काम को सही तरीके से योजना बनाकर किया जाए तो कम समय में भी बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं.
कार्यस्थल का माहौल भी काफी मायने रखता है
सिटिंग वर्क करने वाले लोगों के लिए कार्यस्थल का माहौल भी काफी मायने रखता है. ऑफिस या घर में काम करने की जगह आरामदायक और व्यवस्थित होनी चाहिए. अच्छी कुर्सी, सही ऊंचाई की टेबल और पर्याप्त रोशनी काम करने के अनुभव को बेहतर बनाती है. इसके साथ ही कार्यस्थल पर साफ-सफाई और ताजी हवा का होना भी जरूरी होता है. जब कार्यस्थल अनुकूल होता है तो काम करने में मन भी लगता है और थकान भी कम महसूस होती है।
सबसे अच्छा तरीका है जागरूकता
विशेषज्ञों का मानना है कि सिटिंग वर्क से जुड़ी समस्याओं से बचने का सबसे अच्छा तरीका है जागरूकता. अगर लोग अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करें और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें तो कई समस्याओं से बचा जा सकता है. आज जरूरत इस बात की है कि लोग काम के साथ-साथ अपनी सेहत का भी ध्यान रखें. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सही कार्यशैली अपनाकर सिटिंग वर्क को भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है.
सिर्फ मेहनत ही नहीं बल्कि स्मार्ट तरीके से काम करना जरूरी
बदलते समय के साथ सिटिंग वर्क आधुनिक कार्य संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है. हालांकि इसके साथ कुछ स्वास्थ्य चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं. लेकिन अगर सही आदतें अपनाई जाएं और काम के बीच-बीच में शरीर को सक्रिय रखा जाए तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है.सही मुद्रा में बैठना, नियमित ब्रेक लेना, हल्की स्ट्रेचिंग करना, आंखों को आराम देना और संतुलित जीवनशैली अपनाना ऐसे उपाय हैं जो सिटिंग वर्क को भी स्वस्थ और प्रभावी बना सकते हैं. आज के व्यस्त जीवन में यह जरूरी है कि हम सिर्फ मेहनत ही नहीं बल्कि स्मार्ट तरीके से काम करें। जब काम और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनेगा तभी जीवन भी सफल और स्वस्थ बन सकेगा.
Thenewspost - Jharkhand
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