नोटबंदी का फैसला केंद्र सरकार के अकेले का नहीं था, बल्कि सिफारिश की गई थी, जानिए कोर्ट में क्या कहा मोदी सरकार ने

    नोटबंदी का फैसला केंद्र सरकार के अकेले का नहीं था, बल्कि सिफारिश की गई थी, जानिए कोर्ट में क्या कहा मोदी सरकार ने

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): भारतीय अर्थव्यवस्था में काला धन समानांतर अर्थव्यवस्था के रूप में माना जाता रहा है. इसको लेकर केंद्र सरकार हमेशा चिंतित रही है. 2016 में मोदी सरकार ने अचानक नोटबंदी कर दी. इसके तहत 500 और 1000 रुपए के प्रचलन में चल रहे नोट को अवैध घोषित कर दिया था. 8 नवंबर 2016 को मध्य रात्रि से इसे लागू कर दिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा अचानक की थी. अचानक हुई नोटबंदी की वजह से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. इस संबंध में कोर्ट में अनेक याचिकाएं दाखिल की गई थीं. उन पर 24 नवंबर को सुनवाई होनी है. 

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संबंध में अपना पक्ष रखने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने यह बताया कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के तहत कभी भी किसी करेंसी नोट को वापस लेने का एकाधिकार केंद्रीय बैंक को है. केंद्र सरकार ने यह दवा किया है की नोटबंदी का फैसला उसका अकेले का नहीं था इसकी सिफारिश भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने की थी. इस प्रयोग को बहुत ही सोच समझकर लागू किया गया था और इसके लिए तैयारी भी की गई थी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर रहा है कि यह विषय मौद्रिक नीति से जुड़ा हुआ है. इसलिए कोर्ट को इस पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए.


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