अब जानवरों में सरोगेसी संभव, अच्छी नस्ल के गाय के लिए मददगार

    अब जानवरों में सरोगेसी संभव, अच्छी नस्ल के गाय के लिए मददगार

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : आजकल कुछ भी नामुमकिन नहीं है. साइंस और टेक्नोलॉजी इतना आगे बढ़ गया है कि लोगों का जीवन बहुत आसान हो गया है. वहीं आजकल एक शब्द काफी चर्चित है और वो है सरोगेसी. खासकर फिल्मी दुनिया में यह शब्द काफी चर्चा में है.  प्रियंका चोपड़ा से लेकर शाहरुख खान, आमिर खान, करण जौहर और शिल्पा शेट्टी जैसे तमाम एक्टर एक्ट्रेस ने सरोगेसी का मदद लिया है. सरल भाषा में बताएं तो सरोगेसी का मतलब यह है कि पत्नी के अलावा किसी दूसरी महिला की कोख में अपने बच्चे को पालना सरोगेसी कहलाता है. काफी बार ऐसा होता है कि किसी ना किसी समस्या के तहत कोई महिला बच्चे को नहीं पाल पाती जिसकी वजह से उसे इस सरोगेसी का सहारा लेना पड़ता है. अब इस सरोगेसी का सहारा इंसान ही नहीं बल्कि जानवर भी ले सकते हैं. जी हां अब मवेशियों में भी सरोगेसी का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    अच्छी नस्ल की गाय भैंस के लिए इसका सहारा

    आप गाय भैंस में भी सरोगेसी संभव है. अच्छी नस्ल की गाय भैंस के लिए इसका सहारा लिया जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग काफी तेजी से गाय भैंस और बकरी के पालन कर रहे है. इसकी संख्या में भी काफी वृद्धि हो रही है और लोग इससे काफी अच्छा खासा बिजनेस भी कर रहे हैं. गाय भैंस से दूध के उत्पादन से किसानों को काफी मदद मिलती है. मगर अक्सर किसानों में इस बात का शंका रहता है कि कौन सी नस्ल की गाय ज्यादा दूध देती है. जिसको घर लाकर और उससे अच्छा खासा दूध मिल पाए. अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा सके. अब उनकी इस समस्या का भी छुटकारा मिल चुका है. सरोगेसी की मदद से अब जानवरों में भी ये संभव हो गया है.

    जानिए कैसे मवेशियों में किया जाता है इसका इस्तेमाल

    मवेशियों में सरोगेसी एंब्रियो ट्रांसप्लांट तकनीक के जरिए होगा. इसके लिए आपको सबसे पहले गाय और भैंस जो सबसे ज्यादा दूध देती है उसके लिए सांड और भैंस का चुनाव करना होगा. यानी आपको यह मेल मिलाना पड़ेगा कि कौन सी गाय की नस्ल अच्छी दूध देती है. इसके बाद सांड और भैंसों की सिमेन कलेक्ट किया जाता है.  उसी वक्त किसी दूसरे गाय और भैंस की सीट पीरियड्स में उसके अंदर से अंडाणु कलेक्ट कर लेते है. लैब में सिमेन और अंडाणु की सहायता से एक अन्य फर्टाइल का विकास किया जाता है. इन अंडाणु के विकसित होने के बाद उसे है गाय में ट्रांसप्लांट किया जाता है. ठीक उसी तरह भैंस के विकसित अंडाणु को भैंस में ट्रांसप्लांट किया जाता है. सरोगेसी की मदद से हम एक समय में कई गाय और भैंस को गाभिन करा सकते हैं.


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