टीएनपी डेस्क(TNP DESK): झारखंड में प्रचंड गर्मी के प्रभाव से लोग झुलस रहे है. चिलचिलाती धूप और गर्म हवा वाले लू के थपेड़े रही-सही कसर भी पूरी कर रहे है. आलम ये है कि लोगों का जीना मुहाल हो गया. आज राज्य के आधा से अधिक जिलों का तापमान 40 डिग्री के पार जा चुका है. वहीं कभी हिल स्टेशन कही जानेवाली रांची आज हिट स्टेशन बनकर लोगों को जला रही है. आलम ये है कि राज्य के सबसे गर्म जिलों की लिस्ट में जमशेदपुर और पलामू के साथ रांची भी शामिल हो गई है.

आखिर किन वजहों से हिल स्टेशन से हिट स्टेशन बनी रांची
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों कुछ सालों में ही अचानक हिल स्टेशन रांची हिट स्टेशन में तब्दील हो गई है. आखिर राज्य के सबसे ज्यादा राहत देनेवाली रांची क्यों लोगों को जलाने पर तुली है. तो आपको बता दें कि इसके पीछे शहर की लगातार बढ़ती हुई आबादी और बिल्डरों की मनमानी है. जो लगातार पेड़ो को काटकर ऊंची-ऊची बिल्डिंगों का निर्माण करवा रहे है. इसके साथ ही उंचे नंगे पहाड़ और कॉन्क्रीट के जंगल भी गर्मी को वापस वातावरण में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है. जिसकी वजह से लगातार शहर के तापमान में बेतहाशा वृद्धि हो रही है. और धीरे-धीरे रांची हीट आइलैंड इफेक्ट की चपेट में आ रही है.

ठंडे मौसम को देखते हुए अंग्रेजों ने सीआईपी का निर्माण कराया था
आपको बतायें कि जब देश अंग्रेजों के हाथों गुलाम था. उस समय उनलोगों ने रांची की खूबसूरत हरी-भरी वादियों को देखकर यहां अपना ठिकाना बना लिया था. गर्मी के दिनों में यहां का ठंडा मौसम उनको सुकून देता था. इसके साथ रांची के कांके में स्थित पागलखाना सीआईपी का निर्माण भी रांची के ठंडा मौसम को देखते हुए 1918 में मनोरोगी अंग्रेज सैनिकों के लिए किया गया था. ताकि गर्मी के दिनों में मनोरोगियों का दिमाग ठंडा रहे.

बढ़ती वाहनों की संख्या भी है जिम्मेदार
वहीं शहर में वाहनों की वजह से भी लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है. इससे भी मौसम मों काफी इफेक्ट पड़ता है. आज सड़क पर आपको लोगों से ज्यादा वाहनों की संख्या दिखाई देगी. आज कोई भी घर आपको ऐसा नहीं मिलेगा जहां तीन या चार गाड़ियां नहीं हो. इतने वाहनों से रोजाना कितना जहरीला धूआं निकलता है. ये भी मौसम को गर्म करता है.

ऊंची- ऊंची बिल्डिंग और लोगों की बेतहाशा भीड़ वजह
रांची में भले ही आज जहां तक नजर जाती है, वहां तक ऊंची- ऊंची बिल्डिंग और लोगों की बेतहाशा भीड़ दिखाई देती होगी. लेकिन कुछ सालों पहले रांची हरे-भरे जंगलों और पेड़ों से भरी दिखाई देती थी. जहां सुकून की जिंदगी होती थी. झारखंड राज्य में रांची को हिल स्टेशन के नाम से जाना जाता था. राज्य में चाहे कितनी भी गर्मी हो.लेकिन रांची का मौसम हमेशा ठंड भरा रहता था. और यहां का पारा हमेशा ही सभी जिलों से सबसे कम होता था. यहां आकर लोगों को गर्मी से राहत मिलती थी. रांची को झारखंड का स्वर्ग कहा जाता था. यहां का मौसम साल के 12 महीने सुहाना ही हुआ करता था.
रांची के इन शहरी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा तापमान
जिस ईलाके में जितनी ज्यादा आबादी है. वहां उतनी ही ज्यादा गर्मी है. रांची के टाउन वाले और घनी आबादी वाले ईलाको में जैसे कोकर, सर्कुलर रोड, अपर बाजार, रातू रोड, , पिस्का रोड, ज्यादा गर्म रहता है. इन जगहों पर पेड़ों के नहीं होने की वजह से लोगों का गर्मी से हालत खराब रहती है. तो वहीं बड़ी-बड़ी बिल्डिगें हवा को रोक लेती है. जिससे गर्मी का प्रभाव लोगों की परेशानी का सबब बन जाता है.
इन वजहों से नहीं होती है रांची में बारिश
रांची में लगातार बढ़ती गर्मी की वजह बताया कि रांची घनी आबादी वाला क्षेत्र है. जहां खुले स्थान नहीं है. ये पूरी तरह से बिल्डिंगों से ढ़की हुई है. जिसकी वजह से बादल बहुत ही कम उंचाई पर बनते है. जबकि खुले और मैदान वाले इलाकों में बादल बहुत ज्यादा ऊंचाई पर बनते है. कम ऊंचाई वाले बादलों को बिल्डिंगों से उठनेवाली गर्म हवा शहर से दूर धकेल देती है. जिसकी वजह से रांची और आस-पास के ईलाकों में बारिश होती है. लेकिन रांची में बहुत कम बारिश हो रही है.
मौसम के साथ लगातार किया गया खिलवाड़
आज लेकिन रांची का नजारा कुछ और है. लोगों और बिल्डरों ने यहां के मौसम के साथ लगातार खिलवाड़ किया. पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई की गई. और ऊंची बिल्डिंग का निर्माण करके इसके साथ मनमानी की गई. आज यहां शहर में कहीं भी आपको पेड़ या जंगल नहीं दिखाई देंगे. बढ़ती हुई जनसंख्या और बिल्डिंगों की ऊंची इमारतों की संख्या ने यहां के मौसम पर ऐसा दबाव डाला कि रांची हिल स्टेशन से हिट स्टेशन बनकर आज आग उगलने पर मजबूर हो गई है.
रिपोर्ट-प्रियंका कुमारी


