लाल किले से पीएम मोदी ने देश के हर बलिदानी को नमन करने के बाद लिये पांच प्रण, जानिये उनके भाषण की खास बातें

    लाल किले से पीएम मोदी ने देश के हर बलिदानी को नमन करने के बाद लिये पांच प्रण, जानिये उनके भाषण की खास बातें

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): देश आज 75 वीं सालगिरह मना रहा है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर तिरंगा फहराया. साथ ही उन्होंने समस्त देशवासियों को इसकी शुभकामना दी. राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद उन्होंने राष्ट्र को संबोधित किया. गांधी, सुभाष चंद्र बोस, अंबेडकर और वीर सावरकर को याद कर उन्होंने  कहा कि आज देश के हर बलिदानी को नमन करने का दिन है. 

    75 साल की हमारी ये यात्रा अनेक उतार चढ़ाव से भरी रही 

    पीएम मोदी ने सोमवार सुबह लाल किले की प्राचीर से 7.30 बजे तिरंगा फहराया. यह 9वां मौका है, जब उन्होंने भारत के पीएम के तौर पर स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया है. इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारा तिरंगा आन बान शान के साथ लहरा रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि, देश मंगल पांडे, तात्या टोपे, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकउल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल और ब्रिटिश शासन की नींव हिलाने वाले हमारे असंख्य क्रांतिकारियों का आभारी है. लाल किले से पीएम मोदी ने कहा कि, हर भारतीय गर्व से भर जाते हैं जब वे भारत की महिलाओं की ताकत को याद करते हैं- चाहे वह रानी लक्ष्मीबाई हो, झलकारी बाई, चेन्नम्मा, बेगम हजरत महल. 

    उन्होंने कहा कि 75 साल की हमारी ये यात्रा अनेक उतार चढ़ाव से भरी हुई है. सुख दुख की छाया मंडराती रही है. इसके बीच भी हमारे देशवासियों ने पुरुषार्थ किया. उपलब्धियां हासिल कीं. ये भी सच्चाई है कि सैकड़ों सालों की गुलामी ने गहरी चोटें पहुंचाई हैं. इसके भीतर एक जिद थी, जुनून था.आजादी मिल रही थी तो देशवासियों को डराया गया. देश के टूटने का डर दिखाया गया. लेकिन, ये हिंदुस्तान है. ये सदियों तक जीता रहा है. हमने अन्न का संकट झेला, युद्ध के शिकार हुए. आतंकवाद का प्रॉक्सीवार, प्राकृतिक आपदाएं झेलीं, लेकिन इसके बावजूद भारत आगे बढ़ता रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'जय हिंद' के साथ अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का समापन किया. पीएम मोदी का ये भाषण 82 मिनट का रहा. 

    पहला प्रण- अब देश बड़े संकल्प लेकर ही चलेगा. बहुत बड़े संकल्प लेकर चलना होगा। यह संकल्प है- विकसित भारत.

    दूसरा प्रण- किसी भी कोने में गुलामी का एक भी अंश अगर अब भी है तो उसे किसी भी हालत में बचने नहीं देना है. अब शतप्रतिशत सैकड़ों सालों की गुलामी ने हमारे मनोभावों को जकड़ कर रखा है. हमें गुलामी की छोटी से छोटी चीज से मुक्ति पानी ही होगी.
    तीसरा प्रण- हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए. क्योंकि यही विरासत है जिसने कभी भारत को स्वर्णिम काल दिया था. इस विरासत के प्रति हमें गर्व होना चाहिए.
    चौथा प्रण- यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है. वह है एकता और एकजुटता. 130 करोड़ देशवासियों में एकता. एकता की ताकत एक भारत श्रेष्ठ भारत के सपनों के लिए है.
    पांचवां प्रण- नागरिकों का कर्तव्य. इसमें पीएम भी बाहर नहीं होता, सीएम भी बाहर नहीं होता क्योंकि वह भी नागरिक हैं.


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