टीएनपी डेस्क (TNP DESK): IPL 2026 का सीजन जितना ही रोमांचक हैं उतना ही क्रेज़ भरा हैं. वहीं दूसरी ओर एक और बड़ी कहानी सामने आ रही हैं जहां खिलाड़ियों को चोट लगने की वजह से टीम के बाहर होना पड़ा है. ऐसे में इस बार बहुत से ऐसे खिलाड़ी हैं जो टूर्नामेंट से ही बाहर हो चुके हैं. इन सब चीजों का असर सिर्फ एक टीम तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे टीम की स्ट्रैटेजी को भी प्रभावित करता हैं.
आज के समय के क्रिकेट पहले से बहुत ही ज्यादा तेज और चुनौतीपूर्ण हो चुका हैं. लगातार बैक टू बैक मैच, एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा, प्रैक्टिस सेशन और मानसिक दबाव, ये सारी चीजें मिलाकर खिलाड़ियों के शरीर पर काफी ज्यादा असर पड़ता हैं. खासकर की टी20 मैच में रफ्तार और दबाव और भी ज्यादा तेज हो जाती हैं. साथ ही साथ गेम हाई इन्टेन्सिटी पर खेला जाता हैं इसीलिए चोट लगने का खतरा बढ़ सकता हैं. इस सीजन में कारण यही हैं की खिलाड़ी या तो पहले ही गेम से बाहर हो जाते हैं या बीच गेम से.
अब बात करते हैं टीम के स्टार कि तो अगर टीम के मेन खिलाड़ी ही चोटिल हो जाए तो टीम का संतुलन बिगड़ जाता हैं. उदाहरण के तौर पर अगर हम देखें तो अगर टीम का तेज गेंदबाज ही घायल हो जाए तो उस टीम की गेंदबाजी की रणनीति ही बदल जाती हैं. ठीक उसी तरह अगर टीम का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज चोटिल हो जाए तो बल्लेबाज़ी क्रम में बदलाव करना पड़ता है.
फिर यहीं से शुरू होती हैं टीम मैनेजमेंट की असली परीक्षा. IPL 2026 में अब सिर्फ अपने 11 प्लेयर्स पर ही ध्यान नहीं दिया हैं बल्कि बेंच स्ट्रेनथ को भी बढ़ाया हैं या फिर कह लीजिए काफी खिलाड़ियों को रिजर्व कर लिया गया हैं ताकि जो खिलाड़ी मैच के वक्त घायल हो जाए उसके जगह उस रिजर्व खिलाड़ी को भेज दिया जाता हैं और अगर वो रेसर्व खिलाड़ी को मौका मिला खेलने का और वो अपनी पाड़ी खेल लेंगे और टीम को विनर बनाते हैं तो भी टीम का हीरो बन जाते हैं.
इस सीजन एक और चीज देखने को मिल रहा हैं रोल फ्लेक्सबिलटी , यानि की अब खिलाड़ी सिर्फ एक ही भूमिका नहीं निभाते बल्कि काफी सारे निभाते हैं. अगर टीम का ओपनर चोटिल हो जाता है, तो मिडिल ऑर्डर का बल्लेबाज़ ऊपर आ सकता है.
इसके अलावा एक और चीज भी बेहद ज्यादा जरूरी हो चुका हैं वर्कलोड मैनेजमेंट. आपने एक और चीज देखा होगा की टीमे अब लगतार खिलाड़ियों को हर मैच में नहीं खेलने दिया जाता हैं उन्हें बीच-बीच में आराम दिया जा रहा है ताकि चोट का खतरा कम हो सके इसका मतलब हैं की सबको टीम मे बराबर चांस दिया जा रहा हैं खेलने के लिए.
आपको ये भी बता की चोट सिर्फ शारीरिक ही नहीं लगती बल्कि ये सारी चीज़े मानसिक दबाव भी देती हैं. जब भी टीम का बड़ा खिलाड़ी बाहर होता हैं तो पूरे टीम के मानसिक स्तिथि पर दबाव होता हैं जिसके कारण मैच पे भी जोर पड़ता हैं और टीमे मैच हार जाती हैं. क्रिकेट अब सिर्फ बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी का खेल नहीं रहा, बल्कि फिटनेस, प्लानिंग और रणनीति का भी खेल बंता जा रहा.
Thenewspost - Jharkhand
4+


