ध्यान दें! बिजली बिल बिगाड़ सकती है आपके घर का बजट, 10 रुपये प्रति यूनिट दर बढ़ने से लग सकता है बड़ा झटका

    ध्यान दें! बिजली बिल बिगाड़ सकती है आपके घर का बजट, 10 रुपये प्रति यूनिट दर बढ़ने से लग सकता है बड़ा झटका

    रांची (RANCHI): झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने अगले वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बिजली की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है. निगम का कहना है कि बिजली खरीद की बढ़ती लागत, पुराने बकाया, मेंटेनेंस खर्च और सप्लाई सिस्टम को मजबूत करने के लिए यह कदम जरूरी है. यह प्रस्ताव 30 नवंबर 2025 तक झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसइआरसी) को भेजा जाएगा.

    सूत्रों के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं की दरें बढ़ाकर 10 रुपये प्रति यूनिट तक करने का सुझाव दिया गया है. वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दर 9 रुपये प्रति यूनिट रखने का प्रस्ताव है. हालांकि अंतिम फैसला आयोग ही करेगा.

    फिलहाल कितनी है बिजली दर और क्या है नया प्रस्ताव?
    मौजूदा दरें (2025–26)
    शहरी घरेलू: 6.65–6.85 रुपये प्रति यूनिट
    ग्रामीण घरेलू: 6.30–6.70 रुपये प्रति यूनिट
    पिछले साल जेबीवीएनएल ने करीब 40% बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था, लेकिन आयोग ने सिर्फ 6.34% वृद्धि मंजूर की थी.

    चयनित श्रेणियों में अंतर कुछ इस तरह है:
    श्रेणी                 वर्तमान दर             प्रस्तावित दर
    ग्रामीण घरेलू  6.30                     लगभग 10 रुपये (संभावित)
    शहरी घरेलू   6.65–6.85            10 रुपये प्रस्तावित
    औद्योगिक     5.30–6.05             9 रुपये प्रस्तावित

    (अंतिम बदलाव आयोग की सुनवाई पर निर्भर करेगा.)

    निगम की आर्थिक हालत
    जेबीवीएनएल का कहना है कि उसे हर साल 400–500 करोड़ रुपये का घाटा होता है. बिजली खरीद, रखरखाव और अन्य खर्च मिलाकर कुल लागत 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, जबकि आय सिर्फ 6,000–7,000 करोड़ रुपये ही होती है. एटीएंडसी लॉस करीब 20% है, जिससे नुकसान और बढ़ता है.

    एमडी का पद खाली, फिर भी प्रस्ताव तैयार
    निगम में पिछले दो महीने से मैनेजिंग डायरेक्टर का पद खाली है. इसके बावजूद टैरिफ प्रस्ताव तय समय पर दाखिल करने की तैयारी है. बाद में निदेशक मंडल से औपचारिक मंजूरी ली जाएगी.

    उपभोक्ताओं पर सीधा असर
    अगर आयोग ने प्रस्ताव मंजूर किया तो घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं दोनों को ज्यादा बिजली बिल भरना पड़ेगा. जन-सुनवाई के दौरान कई उपभोक्ता संगठन अपनी आपत्तियां रख सकते हैं. निगम का कहना है कि यह बढ़ोतरी बिजली व्यवस्था सुधारने, लाइन लॉस कम करने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने के लिए जरूरी है


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