पेजर ने दुनिया को दिखाया खौफ का नया मंजर, कहीं भी कोई भी हो सकता है साजिश और हमले का शिकार

    पेजर ने दुनिया को दिखाया खौफ का नया मंजर, कहीं भी कोई भी हो सकता है साजिश और हमले का शिकार

    टीएनपी डेस्क: इजरायल-हमास युद्ध में अब तक स्थानीय लोग सिर्फ गोलीबारी और बम से डरते थे. लेकिन अब वहां के लोगों को टेक्नोलॉजी से भी डर लगने लगा है. सिर्फ लेबनान को ही नहीं इजरायल ने दुनिया को एक नया खौफ मंजर दिखा दिया है. लोगों में अब इस बात का डर बैठ गया है कि कहीं भी किसी भी जगह इस टेक्नोलॉजी के जरिए उन पर हमला हो सकता है और उनकी जान जा सकती है. दुनिया में करोड़ों लोग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, अब तक इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ लोगों से जुडने के लिए किया जाता था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल लोगों की जान लेने के लिए भी किया जा रहा है. इजरायल ने पेजर ब्लास्ट कर जिस तरह से लेबनान में तहलका मचाया, वह हर किसी को यही सोचने पर मजबूर कर दे रहा है की क्या वाकई में टेक्नोलॉजी इतना खतरनाक है.

    कल को स्मार्टफोन में भी हो सकता है यह धमाका 

    पेजर ब्लास्ट से लेबनान में लगभग 2000 से ज्यादा लोग घायल हो गए और कई लोगों की मौत हो गई. लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि, जब छोटा सा पेजर इतना धमाका कर सकता है तो फिर लोगों के हाथ में 24 घंटे रहने वाले स्मार्टफोन और घरों में रखे कंम्प्युटर और लैपटॉप कितना धमाका कर सकते हैं. ये सोचने वाली ही बात है की अब तक लोग जिसका इस्तेमाल दुनिया से जुडने के लिए करते आ रहे हैं उसका इस्तेमाल अब उन्हीं की जान लेने के लिए किया जा रहा है. वहीं, ये धमाका सिर्फ अभी लेबनान में हुआ है कल को यह कहीं भी किसी भी देश में किया जा सकता है. या यूं कहे की बदला लेने का नया तरीका इजरायल ने दुनिया को दिखा दिया है. वहीं, बात करें अन्य देशों कि तो अमेरिका सहित कई देशों को इस पेजर ब्लास्ट ने टेंशन दे दिया है. ऐसे में सवाल उठता है की आखिर ये पेजर क्या बला है और जंग में कैसे इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.

    क्या है पेजर?

    पेजर एक वायरलेस कम्युनिकेशन डिवाइस है. जिसका इस्तेमाल मैसेज भेजने और रिसीव करने के लिए किया जाता है. पहले के समय में अभी की तरह स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं किया जाता था. 1950 से 1990 के दशक तक में लोग मैसेज भेजने और रिसीव करने के लिए पेजर का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करते थे. उस वक्त पेजर एक भरोसमंद संचार साधन था, जो 40KM की रेंज तक काम करता था. पेजर का ज्यादातर इस्तेमाल आपातकालीन स्थितियों में मैसेज भेजने और अलर्ट करने के लिए किया जाता था.

    कैसे काम करता है पेजर

    मोबाइल नेटवर्क की तरह पेजर किसी नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहता है. यह मैसेज भेजने और रिसीव करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करता है. पेजर का इस्तेमाल खासकर उन जगहों में ज्यादा किया जाता था जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर होता था. पेजर से दूसरे पेजर यूजर को भेजे जाने वाले मैसेज फोन नंबर या टेक्स्ट हो सकते हैं.  

    दो तरह के होते हैं  पेजर

    पेजर दो तरह के होते हैं. जिनमें पहला वन वे पेजर होता है. इसमें सिर्फ मैसेज रिसीव किया जा सकता है भेजा नहीं जा सकता. वहीं, दूसरा टू वे पेजर, जिसमें मैसेज रिसीव करने के साथ-साथ भेजा भी जा सकता है. मैसेज आने पर यह बीप साउन्ड करता है. इसलिए इसे बीपर भी कहा जाता है. पेजर से वॉयस या नंबर और टेक्स्ट मैसेज भेजा सकता है. इससे मैसेज भेजने के लिए दूसरे पेजर का कोड नंबर डायल करना होता है. कोड नंबर डायल करते ही मैसेज कोड नंबर वाले पेजर पर चला जाता है.

    पेजर कैसे हुआ विस्फोटक

    पेजर एक वायरलेस कम्युनिकेशन डिवाइस है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर एक साथ अलग- अलग जगहों पर पेजर कैसे ब्लास्ट हो गया. लेबनान में हुए इस पेजर ब्लास्ट पर रिपोर्ट्स यही बताते हैं कि, पेजर्स को हैक किया गया था. बता दें कि, पेजर की सिक्योरिटी सिस्टम कमजोर होती है. जिसके कारण इसे आसानी से हैक कर इसमें मौजूद डेटा को ट्रैक या ट्रेस किया जा सकता है. हैक करने के बाद आसानी से हैकर्स इसे अपनी कमांड के हिसाब से यूज कर सकते हैं. ऐसे में आसानी से पेजर हैक कर उसका इस्तेमाल विस्फोट के लिए किया जा सकता है. लेबनान में हुए धमाके से ही आप इस बात का अंदाज लगा सकते हैं की यह दिखने में छोटा सा डिवाइस कितना बड़ा धमाका कर सकता है. लोगों के हाथों में और पॉकेट में ही इसे हैक कर आसानी से ब्लास्ट किया जा सकता है. दूसरा तरीका ये भी हो सकता है कि, सप्लाई के दौरान या पेजर्स को बनाने के दौरान ही पेजर्स में बारूद या विस्फोटक लगा दिए गए हों. साथ ही ऐसा सेटिंग कर दिया गया हो पेजर तभी ब्लास्ट हो जाए जब उन पर कोई एक खास तरह का मैसेज आए.


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