अब गांव खुद लेंगे फैसले! पेसा कानून से ऐसे बदलेगा झारखंड के गांवों चेहरा, जानिए क्या-क्या होंगे बदलाव
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टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग ने आखिरकार पेसा नियमावली को अधिसूचित कर दिया है. इसके साथ ही राज्य के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभाओं को निर्णायक अधिकार मिल गए हैं. अब सिर्फ विकास योजनाएं ही नहीं, बल्कि गांव से जुड़े लगभग हर तरह के विवाद और फैसले ग्राम सभा के स्तर पर ही लिए जाएंगे. इस नई व्यवस्था के तहत राजस्व ग्राम की भूमिका के साथ-साथ गांवों में सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक मामलों का निपटारा भी ग्राम सभा करेगी. पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को कई ऐसे अधिकार दिए गए हैं, जो पहले सरकारी विभागों या प्रशासन के पास थे.
उपायुक्तों की अहम जिम्मेदारी
पंचायती राज विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में साफ कहा गया है कि हर जिले के उपायुक्त की जिम्मेदारी होगी कि वे पारंपरिक ग्राम, ग्राम सभाओं और उनकी सीमाओं की मान्यता का प्रकाशन करें. सामान्य तौर पर हर पारंपरिक ग्राम सभा को राजस्व ग्राम के बराबर माना जाएगा. हर गांव में एक ग्राम सभा होगी, जिसका गठन ग्राम सभा निर्वाचक नामावली में दर्ज सभी लोगों से होगा. उपायुक्त प्रखंड स्तर पर एक टीम बनाएंगे, जो पारंपरिक ग्राम सभा के प्रधान और सदस्यों के साथ मिलकर ग्राम सभा की सीमाओं की पहचान और उसका अभिलेखन करेगी. यह टीम पारंपरिक ग्राम सभा क्षेत्रों की सीमाओं को लेकर एक प्रस्ताव तैयार करेगी. इसमें ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाली टोलास्तरीय ग्राम सभाओं का पूरा विवरण होगा. इस प्रस्ताव को उपायुक्त एक महीने के लिए सार्वजनिक करेंगे और आपत्तियां मांगी जाएंगी. आपत्तियों के निपटारे के बाद तीन महीने के भीतर अंतिम सूची प्रकाशित कर दी जाएगी.
पेसा कानून के प्रावधान हुए स्पष्ट
इस अधिसूचना में पेसा कानून से जुड़े कई अहम बिंदुओं को विस्तार से बताया गया है. इसमें पारंपरिक ग्राम सभा से लेकर उच्च स्तर की सभाएं, ग्राम सभा की बैठक, बैठक की तारीख और समय, ग्राम सभा अध्यक्ष और सहायक सचिव की जिम्मेदारियां, बैठक संचालन और निर्णय प्रक्रिया जैसे विषय शामिल हैं. इसके अलावा ग्राम सभा कोष, सामुदायिक संसाधनों का प्रबंधन, परंपराओं का संरक्षण और विवादों का निपटारा, पुलिस की भूमिका, ग्राम सभा द्वारा दंड देने का अधिकार, फैसलों पर अपील की व्यवस्था, विकास योजनाओं का प्रस्ताव और अनुमोदन, सामाजिक अंकेक्षण, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास, लघु जल निकायों का प्रबंधन, लघु खनिज, मादक पदार्थों पर नियंत्रण, लघु वनोपज, बाजारों का प्रबंधन और उधार नियंत्रण जैसे विषयों का भी जिक्र किया गया है.
महीने में कम से कम एक बैठक अनिवार्य
हर ग्राम सभा की बैठक महीने में कम से कम एक बार होगी. यह बैठक तब भी बुलाई जा सकती है जब कुल सदस्यों के 1/10 या 50 सदस्य (जो भी कम हो) लिखित मांग करें. इसके अलावा ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति, जिला परिषद या उपायुक्त के कहने पर भी सात दिनों के भीतर बैठक बुलानी होगी. बैठक और उसकी कार्यवाही पूरी तरह सार्वजनिक होगी. बैठक की तारीख, समय और स्थान तय करने की जिम्मेदारी पारंपरिक रूप से ग्राम सभा की अध्यक्षता कर रहे ग्राम प्रधान या उनके द्वारा नामित व्यक्ति की होगी. बैठक का संचालन ग्राम प्रधान करेंगे और उन्हें अध्यक्ष कहा जाएगा. ग्राम पंचायत का कार्यालय ही ग्राम सभा का कार्यालय माना जाएगा. ग्राम सभा के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाएंगे. ग्राम सभा योजनाओं की निगरानी करेगी, काम की गुणवत्ता, खर्च और मस्टर रोल की जांच करेगी. साथ ही प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी ग्राम सभा की जिम्मेदारी होगी.
बाल श्रम पर सख्ती, लाभार्थियों का चयन ग्राम सभा करेगी
नई नियमावली के तहत बाल श्रम पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. बाहर काम के लिए ले जाए जाने वाले मजदूरों की पूरी जानकारी ग्राम सभा को देनी अनिवार्य होगी. सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान का अधिकार भी ग्राम सभा को दिया गया है. पात्रता मानदंड के आधार पर पारदर्शी और सर्वसम्मत चयन होगा और प्रतीक्षा सूची भी बनाई जाएगी. आपात स्थिति में प्राथमिकता बदलने का प्रावधान भी रखा गया है. ग्राम सभा स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पीडीएस दुकान जैसी सामाजिक संस्थाओं की निगरानी करेगी. नियमित समीक्षा, सामाजिक अंकेक्षण और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक निर्देश जारी करने का अधिकार भी ग्राम सभा के पास होगा.
ग्राम सभा को मिले ये बड़े अधिकार
कुल मिलाकर, पेसा नियमावली लागू होने के बाद झारखंड के गांवों में ग्राम सभा अब सिर्फ एक औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि गांव की सबसे ताकतवर और निर्णायक इकाई बन गई है.
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