टीम में जगह नहीं लेकिन टैलेंट भरपूर: बेंच पर बैठे खिलाड़ियों की आखिर क्या है कहानी?

    क्रिकेट के ग्राउन्ड पर जब 11 खिलाड़ियों का टीम खेलता नजर आता हैं तो दूसरी ओर बाहर बेंच पर बैठे खिलाड़ी उतने लाईंलाईट में नहीं रहते हैं . लेकिन असली बात तो ये हैं की बेंच पर बैठे खिलाड़ियों में से बहुत खिलाड़ी ऐसे हैं जो टीम को जीताने की क्षमता रखते हैं. सवाल यह है—अगर talent इतना है, तो मौका क्यों नहीं?

    टीम में जगह नहीं लेकिन टैलेंट भरपूर: बेंच पर बैठे खिलाड़ियों की आखिर क्या है कहानी?

    TNP DESK- क्रिकेट के ग्राउन्ड पर जब 11 खिलाड़ियों का टीम खेलता नजर आता हैं तो दूसरी ओर बाहर बेंच पर बैठे खिलाड़ी उतने लाईंलाईट में नहीं रहते हैं . लेकिन असली बात तो ये हैं की बेंच पर बैठे खिलाड़ियों में से बहुत खिलाड़ी ऐसे हैं जो टीम को जीताने की क्षमता रखते हैं. सवाल यह है—अगर talent इतना है, तो मौका क्यों नहीं?

    आज के समय में खासकर की ipl जैसे बड़े मंच पर प्रतियोगिता बढ़ गई है. हर टीम के पास एक से एक जबरदस्त और दमदार खिलाड़ी है की playing XI चुनना ही एक कठिन जिम्मेदारी हो गई है एमएम यहां सिर्फ अच्छा होना काफी नहीं, बल्कि सही समय पर सही टीम में फिट होना भी जरूरी है.

    कई बार खिलाड़ी domestic cricket में शानदार प्रदर्शन करता है, लगातार runs बनाते है या विकेट लेते है, लेकिन जब उसे बड़े मंच पर मौका मिलता है, तो या तो वह उतना नहीं होता है या फिर लगातार खेलने का मौका नहीं मिल पाता हैं उन लोगों को. एक मैच खेला, फिर दो मैच बाहर  ऐसे में किसी भी खिलाड़ी के लिए एक लय पकड़ना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है.

    असल में टीम में चुने जाना सिर्फ टैलेंट का खेल नहीं है इसमें टीम की रणनीति , पिच का हाल , सामने वाले टीम और मैनिज्मन्ट का भरोसा सब कुछ शामिल हैं. अगर टीम को ज्यादा बॉलर चाहिए तो एक अच्छा बल्लेबाज बाहर हो सकता है. अगर टीम को अल राउंडर को लेना चाहती हैं तो स्पेसइलिस्ट प्लेयर को बेंच पर बैठना पड़ता हैं.  

    इस पूरे खेल मे एक ही चीज सबसे ज्यादा जरूरी है मौका. कुछ खिलाड़ियों बहुत मौके मिलते हैं तो कुछ को बिल्कुल भी नहीं और जिन लोगों को मौका मिलता है वो लोग खुद को साबित कर पाते हैं लेकिन जिन्हे मौका नहीं मिलता वो खुद को साबित नहीं कर पाते और मैदान में नहीं उतार पाते हैं. यह पर बात फएरनेस्स की  भी आ जाती है , की क्या हर खिलाड़ियों को बराबर मिल रहा है की नहीं?  

    बेंच पर बैठना सिर्फ अटेन्डन्स लगाना नहीं हैं बल्कि एक मेंटल चलेंज भी है क्यूंकी जब आप खेलने योग्य हैं लेकिन फिर भी मौका नहीं मिल रहा, तो गुस्सा आना अंदर से स्वाभाविक है. इससे कॉन्फिडेंस गिरता है जिसके कारण खिलाड़ी के खेल पर भी प्रभाव पड़ता है.

    इतिहास में बहुत से ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने काफी वेट किया और जब मौका मिला तो करके दिखा डाला. इसका साफ - साफ एक ही मतलब है की टैलेंट कभी खतम नहीं होता , बस सही मौके और वक्त का इंतज़ार रहता है.   

    आज के दौर के क्रिकेट में बेंच पर बैठा वो शख्स एक टीम का ताकत माना जाता है लेकिन वही बैठे लोगों की हर दिन परीक्षा भी होती है. उन्हे हर दिन खुद को हर चुनौती के लिए तैयार रहना होता है चाहे वो मानसिक हो या शारीरक, बिना यह जाने की अगली बार मौका कब मिलेगा.

     

     


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