नेवी का मिग-29K फाइटर क्रैश: लगातार सेना का विमान क्यों हो रहा हादसों का शिकार, पिछले कुछ सालों के आंकड़ों ने चौंकाएं

    नेवी का मिग-29K फाइटर क्रैश: लगातार सेना का विमान क्यों हो रहा हादसों का शिकार, पिछले कुछ सालों के आंकड़ों ने चौंकाएं

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): गोवा में नेवी का मिग-29k फाइटर विमान क्रैश हो गया. नेवी के अनुसार विमान रूटीन फ्लाइट के तहत समुन्द्र के ऊपर उड़ान भर रहा था. विमान जब लैंडिंग कर रहा था तो उसमें कुछ तकनीकी खराबी आ गई. जिसके कारण विमान क्रैश कर गया. पायलट ने खुद को सेफली इजेक्ट कर लिया था, इससे उसकी जान बच गई. नेवी ने सर्च ऑपरेशन के जरिए पायलट का रेस्क्यू किया. पायलट की हालत स्थिर बताई जा रही है. नेवी अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है.

    नेवी के इस मिग क्रैश में भले ही पायलट सुरक्षित बच गया हो, लेकिन सेना के विमान के क्रैश का ये मामला नया नहीं है. बहुत से ऐसे दुर्घटना हुए हैं, जिसमें सेना के कई जवान अपनी जान गवा चुके हैं. पूर्व CDS गेनरल बिपिन रावत भी ऐसे ही एक दुर्घटना के शिकार हुए थे. ऐसे में बड़ा सवाल है कि लगातार इतने दुर्घटना कैसे हो रहे हैं. चलिए पहले बीते कुछ सालों में हुए सैन्य विमान दुर्घटनाओं पर नजर डालते हैं.       

    मिग-29k के क्रैश होने से कुछ दिन पहले ही भारतीय सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश में तवांग के पास एक अग्रिम क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. सेना ने कहा था कि हेलीकॉप्टर नियमित उड़ान भर रहा था जब यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसमें सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल शहीद हो गए थे.

    लगातार हो रहे हेलिकाप्टर और विमान क्रैश

    ऐसी दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं. पिछले कुछ वर्षों में, कई हेलिकॉप्टर और विमान दुर्घटनाओं ने भारतीय सेना को झकझोर दिया है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित एक और चीता हेलीकॉप्टर मार्च 2022 में जम्मू और कश्मीर के गुरेज़ में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. हेलिकॉप्टर गुरेज में नियंत्रण रेखा के पास सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को बचाने के लिए बचाव अभियान चला रहा था. तभी यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इंडियन आर्मी एविएशन के हेलिकॉप्टर के सह-पायलट मेजर संकल्प यादव एक अग्रिम क्षेत्र में तैनात एक बीमार जवान को बचा रहे थे. हादसे के बाद मेजर यादव को श्रीनगर के 92 बेस अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया.

    जनरल बिपिन रावत समेत 13 लोग हुए थे दुर्घटना के शिकार  

    साल 2021 में भी सेना के कई हेलिकाप्टर क्रैश हुए. एक आंकड़ा के मुताबिक 2021 में सशस्त्र बलों ने पांच हेलिकॉप्टर क्रैश दर्ज किए - इनमें दो ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), एक चीता और दो Mi-17 V5s शामिल थे. एमआई-17 वी5 हेलिकॉप्टर क्रैश दिसंबर 2021 में तमिलनाडु में हुआ था. इसमें तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत सवार थे. इस हेलिकॉप्टर दुर्घटना में सीडीएस रावत समेत 13 लोगों की मौत हो गई थी. मारे गए अन्य लोगों में सीडीएस की पत्नी मधुलिका रावत और ब्रिगेडियर, लेफ्टिनेंट कर्नल, नाइक और लांस नायक रैंक के कई सैन्य अधिकारी शामिल थे. सरकार ने तमिलनाडु में हेलिकॉप्टर दुर्घटना के कारण के रूप में किसी भी गड़बड़ी या तोड़फोड़ से इनकार किया और दुर्घटना को खराब मौसम के लिए जिम्मेदार ठहराया.  इसके पहले अगस्त 2021 में, पठानकोट स्थित आर्मी एविएशन कॉर्प्स स्क्वाड्रन का एक ध्रुव ALH जम्मू में कठुआ के पास रंजीत सागर जलाशय में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. यह कथित तौर पर एक नियमित उड़ान पर था जब यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में दोनों पायलटों का निधन हो गया था.

    वहीं जनवरी 2021 में जम्मू और कश्मीर के लखनपुर में एक ध्रुव एएलएच दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसमें एक पायलट की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था. 2019 में, एक एमआई-17 वी5 के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, इसमें सवार छह लोगों की मौत हो गई थी. उसी वर्ष भूटान के एक अधिकारी के साथ एक चीता हेलीकॉप्टर भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. एक और आंकड़े के मुताबिक, 1998 से 2018 तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दर्ज किया कि पवन हंस हेलिकॉप्टरों से संबंधित दुर्घटनाओं में 91 लोग मारे गए थे.

    कौन है जिम्मेदार?

    इन हेलिकाप्टर या विमान दुर्घटनाओं में केवल इन सैन्य संपत्तियों की ही कश्ती नहीं होती, बल्कि इनमें सवार उन सेना के जवानों को भी देश खो देता है, जिसकी जान सबसे ज्यादा कीमती होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि इन दुर्घटनाओं का जिम्मेवार कौन है. क्या इन हेलिकाप्टर में कोई कमी है, अगर कमी है तो सुधार क्यों नहीं किया जा रहा है. अगर खराब मौसम में ये हेलिकाप्टर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, तो उन्हें मौसम के अनुरूप अपग्रेड क्यों नहीं किया जा रहा है. कहीं इसमें कोई राजनीति तो नहीं. क्योंकि अगर ऐसा है तो इसकी कीमत बहुत बड़ी चुकाई  जा रही है. ऐसे में दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाकर उन कमियों को दूर करने की दिशा में काम किया जान चाहिए, तभी हमारे जवान भी सुरक्षित रहेंगे.      

     

     


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