Margashirsha Purnima 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा कल, इस दिन दाम करने से घर में आएगी सुख-समृद्धि, अपनाएं ये सरल पूजा और व्रत विधि

    Margashirsha Purnima 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा कल, इस दिन दाम करने से घर में आएगी सुख-समृद्धि, अपनाएं ये सरल पूजा और व्रत विधि

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): मार्गशीर्ष महीना श्री हरि विष्णु और महालक्ष्मी का महीना माना जाता है. चार माह के शयन के बाद कार्तिक देवउठनी एकादशी को योग निंद्रा से जागने के बाद श्री हरि विष्णु और उनकी प्रिय लक्ष्मी की विशेष कृपा इस मार्गशीर्ष महीने में मिलती है. वैसे तो हिन्दू पंचांग में हर महीना ही कुछ खास होता है परन्तु साल के अंत में पड़नेवाला ये हिन्दू माह मार्गशीर्ष उतना ही विशेष है जितना सावन. सावन में जहाँ भोलेनाथ और माता पार्वती  की कृपा बरसती है मार्गशीर्ष या अगहन में श्री हरि विष्णु और महा लक्ष्मी की कृपा बरसती है. देव दीपावली अर्थात कार्तिक पूर्णिमा के बाद शुरू हुए इस महीने में कई व्रत और अनुष्ठान किये जाते हैं. इनमें गुरुवार का व्रत और पूर्णिमा विशेष महत्व रखता है. वैसे तो गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा की जाती है परंतु अगहन अर्थात मार्गशीर्ष में गुरुवार को श्री महालक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. कहते हैं इस माह में किए गए लक्ष्मी पूजन से महालक्ष्मी अतिशीघ्र प्रसन्न होती है और भक्तों को धन वैभव संपत्ति से भर देती है.

    मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की जानकारी

    पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 दिसंबर को सुबह 8 बजकर 37 मिनट से शुरू 

    पूर्णिमा तिथि समाप्त: 5 दिसंबर की सुबह 4 बजकर 43 मिनट पर 

    कैसे करें महालक्ष्मी की पूजा

    मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान से पहले व्रत करना चाहिए.

    नहाने के पानी में तुलसी के पत्ते डालें और फिर स्नान करें.

    किसी पवित्र नदी में स्नान करें या नहाने के जल में गंगाजल मिल लें

    स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें.

    इसके बाद मंत्र जाप कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.

    मंत्र जाप के बाद जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करना अत्यंत लाभकारी होगा.

    संध्या बेला में एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाए.

    उसपर गेंहू की ढेरी बना कर भगवान का आसन तैयार करें.

    उसपर महालक्ष्मी और नारायण की मूर्ति या चित्र रखें

    इसी प्रकार चावल की ढेरी का आसन बनाए

    उसपर गौरी और गणेश की स्थापना करें

    फिर पंचोपचार द्वारा पहले गौरी गणेश की पूजा करें

    गौरी गणेश की पूजा के बाद लक्ष्मी नारायण की पूजा करें.

    घी और तिल के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करें.

    गुड और तिल से बने लड्डुओ का भोग लगाएं

    भोग में अपनी इच्छानुसार चीजें शामिल करें.

    नारायण हृदय स्त्रोत और लक्ष्मी हृदय स्त्रोत का विधिपूर्वक पाठ करें.

    कच्चे दूध को चांदी या पीतल के कलश में रखकर चंद्रमा को अर्ध्य दें.

    सफेद मिठाई या बताशे चंद्रदेव को अर्पित करें

    श्री नारायण और माँ लक्ष्मी की आरती करके पूजन समाप्त करें 

    चंद्रमा की भी उपासना पूजा का है विधान

    इस दिन चंद्रमा देव की पूजा भी की जाती है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को अमृत की प्राप्ति होती है. मार्गशीर्ष हिंदू कैलेंडर में नौवां महीना है और हिंदू शास्त्रों के अनुसार यह समर्पण के लिए जाना जाने वाला महीना है. पुराणों में इस मास को 'मासोनम मार्गशीर्षोहम्'  कहा गया है, अर्थात् मार्गशीर्ष से अधिक शुभ कोई मास नहीं है. भक्त पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और इस दिन अत्यंत भक्ति के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन दत्तात्रेय जयंती भी मनाई जाती है. भगवान दत्तात्रेय को त्रिमूर्ति अवतार (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के रूप में जाना जाता है.

    पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का हर तत्व पर पूर्ण नियंत्रण होता है. इसलिए,  यह हिंदू कैलेंडर के सबसे पवित्र महीने का आखिरी दिन माना जाता है. इस दिन दान करना शास्त्रों में विशेष फलदायी बताया गया है. इस दिन गंगा नदी में ध्यान और स्नान करना भी लाभकारी माना जाता है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर कृपा पाने के लिए श्री हरि विष्णु महालक्ष्मी  और भगवान शिव पार्वती की पूजा करनी चाहिए. कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा को अमृत से सींचा गया था. इसलिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की भी पूजा करनी चाहिए.



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