टीएनपी डेस्क (TNP DESK): राज्य में कई ऐसे अनाथ तथा दिव्यांग पर मेधावी छात्र-छात्रा हैं जो टैलेंटेड होने के बावजूद भी पैसे के अभाव में अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते. ऐसे में उनकी पढ़ाई में सबसे बड़ा रोड़ा बनती है आर्थिक तंगी जिसके कारण वह प्रतिभाशाली होने के बावजूद केवल रुपयों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते. ऐसे में अगर आप भी अनाथ या दिव्यांग हैं या फिर किसी ऐसे जरुरतमन्द को जानते हैं जिसे पढ़ने में रुचि है तो यह खबर आपके लिए बड़े काम की है.
दरअसल झारखंड सरकार ने उच्च और तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे अनाथ तथा दिव्यांग छात्रों के लिए एक बड़ी और राहतभरी पहल की है. राज्य सरकार ने ‘वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना’ शुरू करने का फैसला लिया है, जिसके तहत अब जरूरतमंद छात्रों की ट्यूशन फीस सरकार खुद वहन करेगी. यह योजना शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी और इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 मई 2026 से शुरू हो चुकी है.
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ना है, ताकि पैसे की कमी उनके सपनों के बीच रुकावट न बने. खासकर अनाथ और दिव्यांग छात्रों को तकनीकी, मेडिकल, इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल शिक्षा में आगे बढ़ने का मौका मिल सके. इस योजना का संचालन उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा किया जाएगा. वहीं समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और कल्याण विभाग भी इसमें सहयोगी भूमिका निभाएंगे.

एक छात्र पर सालाना 10 लाख रुपये तक खर्च करेगी सरकार
बताते चले कि वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना के तहत सरकार प्रत्येक छात्र की ट्यूशन फीस के रूप में सालाना अधिकतम 10 लाख रुपये तक की राशि वहन करेगी. हालांकि यदि किसी संस्थान की फीस इससे अधिक होती है, तो अतिरिक्त राशि छात्र को स्वयं देनी होगी. हालांकि योजना में केवल ट्यूशन फीस शामिल की गई है. हॉस्टल शुल्क, भोजन, किताबें और अन्य व्यक्तिगत खर्च छात्रों को खुद वहन करने होंगे.
किन छात्रों को मिलेगा योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ दो प्रमुख वर्गों के छात्रों को मिलेगा—
• अनाथ छात्र, जिनके माता-पिता का निधन उनकी 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले हो चुका हो. इसके लिए प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा.
• दिव्यांग छात्र, जिनकी दिव्यांगता कम से कम 40 प्रतिशत हो और जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत बेंचमार्क श्रेणी में आते हों. ऐसे छात्रों के लिए यूडीआईडी (UDID) कार्ड अनिवार्य किया गया है.
सरकार ने साफ कर दिया है कि इस योजना में लाभार्थियों की संख्या सीमित नहीं होगी. जो भी छात्र निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करेंगे, उन्हें योजना का लाभ मिलेगा. अनुमान के मुताबिक झारखंड में लगभग 45 हजार दिव्यांग छात्र हैं. हालांकि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों का सटीक आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है. सरकार का मानना है कि इस योजना से बड़ी संख्या में छात्र लाभान्वित होंगे.
स्थानीयता और शैक्षणिक योग्यता जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए छात्र का झारखंड का स्थानीय निवासी होना आवश्यक है. इसके अलावा राज्य के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र भी पात्र माने जाएंगे. हर वर्ष छात्रवृत्ति के नवीनीकरण के लिए छात्रों को पिछली परीक्षा की मार्कशीट और अगली कक्षा में नामांकन का प्रमाण पत्र ऑनलाइन अपलोड करना होगा.
किन संस्थानों के छात्रों को मिलेगा फायदा?
झारखंड के मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई कर रहे छात्र इस योजना का लाभ उठा सकेंगे. वहीं राज्य के बाहर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी कुछ शर्तें तय की गई हैं. यदि छात्र राज्य के बाहर किसी संस्थान में पढ़ाई कर रहा है, तो उस संस्थान का देश की ओवरऑल रैंकिंग में टॉप-200 में होना जरूरी होगा. वहीं इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, मैनेजमेंट और फार्मेसी जैसे प्रोफेशनल कोर्स के लिए संस्थान का टॉप-100 में शामिल होना अनिवार्य किया गया है. सरकार की इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे हजारों जरूरतमंद छात्रों को अपने सपनों की उड़ान भरने में नई ताकत मिलेगी.

