कभी बाल मजदूर हुआ करती थी कोडरमा की काजल, अब UN में वैश्विक नेताओं के सामने आवाज कर रही बुलंद, जानिए पूरी कहानी

    कभी बाल मजदूर हुआ करती थी कोडरमा की काजल, अब UN में वैश्विक नेताओं के सामने आवाज कर रही बुलंद, जानिए पूरी कहानी

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): अगर आप भी फिल्मों के शौकीन हैं और बॉलीवुड की फिल्म देखते हैं तो ये किस्सा आपको जाना पहचाना सा लगेगा. बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्मों में आपने देखा होगा कि कैसे एक छोटा बच्चा या बच्ची पहले बाल मजदूरी करता और फिर कुछ ऐसा होता है कि वो मेहनत कर काफी आगे निकल जाता है. ये कहानी भी कुछ ऐसी ही है. लेकिन ये कोई हिंदी फिल्म की कहानी नहीं बल्कि झारखंड के कोडरमा जिले की बेटी काजल की कहानी है. काजल कभी बाल मजदूरी करती थी लेकिन काजल 21 सितंबर को न्यूयॉर्क में यूएन के मंच पर खड़ी थी और वैश्विक नेताओं के बाल मजदूरों की पीड़ा बता रही थी और इस प्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही थी.

    ट्रांसफॉर्मिंग एजुकेशन समिट में बोल रही थी काजल

    दरअसल, कोडरमा की बेटी काजल के लिए 21 सितंबर का दिन यादगार था. काजल न्यूयॉर्क में यूएन के मंच पर खड़ी थी और काजल इस मंच पर वैश्विक नेताओं के बाल मजदूरों की पीड़ा बता रही थी. मौका था संयुक्त राष्ट्र की ओर से आयोजित ट्रांसफॉर्मिंग एजुकेशन समिट (Transforming Education Summit) का. काजल मूलतः कोडरमा के डोमचांच की है और वो महज 20 साल की है. काजल ने कहा कि बालश्रम और बाल शोषण के खात्मे में शिक्षा की अहम भूमिका है. बच्चों को शिक्षा के अधिक से अधिक अवसर देने होंगे, इसके लिए वैश्विक नेताओं को आर्थिक रूप से प्रयास करना चाहिए.

    नोबेल विजेताओं और वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए काजल ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा ही एकमात्र चाबी है. इसी के जरिए ही वे बालश्रम, बाल शोषण, बाल विवाह और गरीबी से बच सकते हैं. कार्यक्रम में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लीमा जीबोवी, स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन लोवेन, बाल अधिकार कार्यकर्ता केरी कैनेडी समेत कई वैश्विक हस्तियां मौजूद थीं.

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    कभी बाल मजदूरी करती थी काजल

    बता दें कि काजल झारखंड के कोडरमा की मधुबन पंचायत स्थित एकतरवा गांव में बाल मित्र ग्राम में बाल पंचायत अध्यक्ष है. लेकिन काजल की जिंदगी में ऐसा भी समय था जब काजल अभ्रक खदान में पिता के साथ मजदूरी करती थी. 14 साल की उम्र में बाल मित्र ग्राम ने उसे ढिबरा चुनने के काम से निकाल स्कूल में दाखिला करवाया. इसके बाद से काजल कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (Kailash Satyarthi Children Foundation) के फ्लैगशिप प्रोग्राम बाल मित्र ग्राम से जुड़ी हुई है. आपको बता दें कि  संस्थान की ओर से ही काजल का चयन अमेरिका जाने के लिए हुआ था.


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