जानिए कैसा रहा दिशोम गुरु शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर, 5 रुपये ने बदल दी जिंदगी 

    जानिए कैसा रहा दिशोम गुरु शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर, 5 रुपये ने बदल दी जिंदगी

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : सन् 1944 में झारखंड के दिशोम गुरु यानी शिबू सोरेन का जन्म हुआ था. उनका जन्म हजारीबाग के नेमार गांव में हुआ था जो आज रामगढ़ जिले में है.उनके पिता का नाम शोभराम सोरेन था. उनकी स्कूली पढ़ाई हजारीबाग जिले में नामदा गांव में हुई वहीं उन्होंने अपनी मैट्रिक तक की शिक्षा प्राप्त की.उनके पिता की इच्छा थी कि दोनों पुत्र पढ़ लिखकर बड़ा नाम हासिल करें. जब हॉस्टल में रहकर शिबू सोरेन अपनी पढ़ाई कर रहे थे तब उनके पिता उन्हें चावल और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने हॉस्टल आया करते थे. 

    5 रुपये ने बदली जिंदगी 

    उनके जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा था मगर उनके संघर्ष की कहानी तब शुरू हुई जब उनके पिता की हत्या कर दी गई. उनके पिता की हत्या गांव के कुछ महाजनों ने कर दी थी. पिता की हत्या ने शिबू सोरेन को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया. इसके बाद उनकी जिंदगी में कई उतार चढ़ाव आए. जो शिबू सोरेन काफी मन लगाकर पढ़ाई कर रहे थे अब उनका पढ़ाई से मन टूट गया. एक दिन वो घर का चावल बेच 5 रुपए लेकर हजारीबाग के लिए चल पड़े.ऐसा कहा जा सकता है कि इसी 5 रुपए में आगे चलकर उनकी जिंदगी बदल दी. 

    राजनीतिक करियर की शुरुआत 

    कुर्मी नेता बिनोद बिहारी महतो ने 1967 में "शिवाजी समाज" की स्थापना की. संथाल नेता शिबू सोरेन ने 1969 में 'सोनत संथाली समाज' की स्थापना की. इसके बाद उनकी राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 में हुई. 4 फरवरी 1973 को शिबू सोरेन महासचिव बने. जिसके बाद 1972 में दुमका लोकसभा सीट जीती. फिर पहली बार 1977 में लोकसभा चुनाव के लिए खड़े हुए. 1980 में लोकसभा चुनाव जीते. इसके बाद 1986 1989 1991 1996 में भी लगातार उन्होंने चुनाव जीते.वहीं 10 अप्रैल 2002 से 2 जून 2002 तक वे राज्यसभा के सदस्य रहें. 

    मुख्यमंत्री बनने का सफर 

    2005 में शिबू सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बने. मगर बहुमत साबित नहीं करने पर कुछ दिनों के बाद ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया था. इसके बाद फिर 27 अगस्त 2008 को शिबू सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. जब वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तो वह दुमका के सांसद हुआ करते थे.18 जनवरी 2009 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया इसके बाद वह तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को झारखंड के मुख्यमंत्री बने. जिसके 4 साल बाद उनके बेटे हेमंत सोरेन ने यह कमान संभाली. 



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