झारखंड में वोटर लिस्ट सुधार की बड़ी पहल: SIR मैपिंग 70% पूरी, 12 लाख नामों की हुई पहचान


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देशभर में जहां एक ओर SIR को लेकर विवाद और बहस जारी है. वहीं झारखंड में मतदाता सूची को दुरुस्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है. राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) रविकुमार ने जानकारी दी है कि एसआईआर से जुड़ी करीब 70 प्रतिशत मैपिंग का कार्य पूरा हो चुका है. उनका स्पष्ट लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे.
सीईओ ने बताया कि रोजगार और पढ़ाई के कारण बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में चले जाते हैं. उदाहरण के तौर पर रांची के कई लोग दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में काम करते हैं. जिससे कई बार एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग जगहों की मतदाता सूची में दर्ज रह जाता है. इसी समस्या को खत्म करने के लिए यह मैपिंग प्रक्रिया की जा रही है.
मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट करने के लिए चल रहे अभियान के तहत अब तक 1 करोड़ 61 लाख से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है. इस दौरान गहन सत्यापन में करीब 12 लाख ऐसे नामों की पहचान हुई है, जो कई वर्षों से अपने मतदान क्षेत्र से बाहर रह रहे हैं.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि शहरी क्षेत्रों में मैपिंग कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए, ताकि आगामी एसआईआर में किसी तरह की परेशानी न हो. इसके लिए सरकारी कार्यालयों में विशेष कैंप लगाकर अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
सीईओ रविकुमार ने यह भी बताया कि झारखंड में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं, जो दूसरे राज्यों से आकर यहां बसे हैं. ऐसे मतदाताओं की मैपिंग उनके पुराने राज्य की एसआईआर सूची से मिलान कर अलग रजिस्टर में दर्ज की जाएगी, जिससे डुप्लीकेसी की समस्या खत्म हो सके.
मतदाता सूची की गुणवत्ता सुधारने में बीएलओ की भूमिका को अहम बताते हुए निर्देश दिए गए हैं कि वे मोबाइल फोन से स्पष्ट फोटो लें और उसे सही तरीके से बीएलओ ऐप पर अपलोड करें.
मतदाताओं की सुविधा के लिए निर्वाचन कार्यालय ने बीएलओ से जुड़ी जानकारी वाले स्टीकर भी जारी किए हैं, जिन पर मतदान केंद्र संख्या, बीएलओ का नाम, विधानसभा क्षेत्र और मोबाइल नंबर दर्ज होंगे. इसके साथ ही 1950 टोल-फ्री नंबर भी जारी किया गया है. ताकि मतदाता आसानी से सहायता प्राप्त कर सकें.
सीईओ ने बताया कि मैपिंग प्रक्रिया के लिए 8 महत्वपूर्ण चेक प्वाइंट तय किए गए हैं, जिनका पालन निरीक्षण के दौरान अनिवार्य होगा. जितनी अधिक मैपिंग अभी पूरी होगी, आने वाले एसआईआर में उतने कम दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी.
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