जानिए झारखंड के सबसे पावरफुल नेता कैसे बने हेमंत !


TNP DESK- आज हम बात कर रहे हैं उस समाज की, जिसे अक्सर लोग सिर्फ जंगलों और पहाड़ों तक सीमित समझ लेते हैं. लेकिन इसी आदिवासी समाज से निकला एक ऐसा नाम, जिसने झारखंड की राजनीति में खुद को मजबूती से स्थापित किया है. हम बात कर रहे हैं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की, जो दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष की विरासत को आज भी आगे बढ़ा रहे हैं,
आदिवासी समाज सिर्फ जंगलों में रहने वाला कोई साधारण समुदाय नहीं है. यह वह समाज है, जो जल, जंगल और जमीन को केवल संसाधन नहीं, बल्कि अपनी पहचान, संस्कृति और जीवनशैली मानता है. लेकिन समय के साथ शोषण करने वाली ताकतों ने आदिवासियों से उनका हक छीनने की कोशिश की. उनकी जमीन छीनी गई, उनके जंगल उनसे दूर कर दिए गए और उनकी आवाज़ को दबाने का प्रयास किया गया.
यहीं से शुरू हुआ एक ऐतिहासिक संघर्ष, जिसका सबसे बड़ा चेहरा बने दिशोम गुरु शिबू सोरेन. शिबू सोरेन झारखंड के सबसे बड़े आदिवासी नेताओं में से एक रहे हैं. वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक हैं और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.
उन्होंने उन लोगों के खिलाफ धान कटनी आंदोलन चलाया, जो आदिवासियों से उनके अधिकार छीन रहे थे. इस आंदोलन ने आदिवासी समाज को यह संदेश दिया कि चुप रहना कभी समाधान नहीं होता. अगर अपने अधिकार चाहिए, तो संघर्ष करना ही पड़ेगा. उनकी सादगी, जुझारूपन और आदिवासियों के प्रति समर्पण के कारण ही लोग उन्हें सम्मान से “दिशोम गुरु” कहने लगे.
दिशोम गुरु का संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ. आज उसी विरासत को उनके बेटे हेमंत सोरेन आगे बढ़ा रहे हैं. हेमंत सोरेन आज झारखंड के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं. वे सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं, आदिवासियों और आम लोगों की आवाज़ बनकर उभरे हैं.
हेमंत सोरेन नए दौर के नेता हैं. वे समझते हैं कि आज का समय डिजिटल है और जनता से जुड़ने के तरीके भी बदल चुके हैं. यही वजह है कि वे सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। चाहे ट्विटर हो, फेसबुक हो या इंस्टाग्राम वे सीधे जनता से संवाद करते हैं, अपनी बात रखते हैं और झारखंड की संस्कृति, आदिवासी मुद्दों तथा सरकार की योजनाओं को देश–विदेश तक पहुंचाते हैं.
इसी का नतीजा है कि आज हेमंत सोरेन का नाम सिर्फ झारखंड में ही नहीं, बल्कि देश और विदेशों में भी जाना जाता है. हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी विधायक पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दावोस पहुंचे थे, जहां उन्होंने झारखंड के लिए कई निवेशकों से बातचीत की. इस दौरान राज्य में निवेश को लेकर अहम पहल हुई, ताकि झारखंड विकास की राह पर और तेज़ी से आगे बढ़ सके.
यह साफ दिखाता है कि हेमंत सोरेन सिर्फ संघर्ष की राजनीति नहीं करते, बल्कि विकास और भविष्य की राजनीति को भी बराबर महत्व देते हैं.
दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने आदिवासियों को जागरूक किया और उन्हें अपने हक के लिए लड़ना सिखाया. आज हेमंत सोरेन उसी विचारधारा को नई सोच, नई तकनीक और नए दौर के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। जल–जंगल–जमीन की यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं है बल्कि अस्मिता, अधिकार और सम्मान की लड़ाई है.
4+