झार नियोजन पोर्टल लॉन्च, लेकिन स्थानीय कौन पर फंस गया पेंच, 1932 या 1985 सरकार से पूछे जा रहे हैं सवाल, देखिये यह रिपोर्ट

    झार नियोजन पोर्टल लॉन्च, लेकिन स्थानीय कौन पर फंस गया पेंच, 1932 या 1985 सरकार से पूछे जा रहे हैं सवाल, देखिये यह रिपोर्ट

    रांची(RANCHI): - हेमंत सरकार ने इस दावे के साथ झार नियोजन पोर्टल को लॉन्च तो जरुर कर दिया कि इसके तहत 75 फीसदी  नौकरी स्थानीय युवाओं को दी जायेगी, लेकिन विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के विधायकों को भी यह सवाल खाये जा रहा है कि आखिर कंपनियां स्थानीय किसको मानेगी, जिन कंपनियों के उपर इस कानून के अनुसार स्थायीय युवाओं को नौकरी देने की बाध्यता है, उनके सामने तो स्थानीयता की कोई परिभाषा ही तय नहीं है.

    नौकरी के दावे महज जुमलेबाजी

    यही कारण है कि 75 फीसदी स्थानीय युवाओं को नौकरी देने की इस पूरी कवायद को अब विपक्ष महज हवाबाजी बतला रहा है, विपक्ष सरकार से इस बात की स्पष्ट जानकारी की मांग कर रहा है कि कंपनियों की नजर में स्थानीय कौन होगा, कंपनियां 1932 के खतियान धारियों को स्थानीय  मानेगी या 1985 वालों को. विपक्ष के अनुसार जब तक सरकार इस मुद्दे पर अपनी नीति साफ नहीं करती, स्थानीय युवाओं को नौकरी देने का दावा महज जुमलेबाजी होगी.

    यहां बता दें कि झारखंड राज्य के निजी क्षेत्र में स्थानीय उम्मीदवारों का नियोजन अधिनियम 2021 के तहत व्यवस्था बनायी गयी है कि झारखंड में कार्यरत निजी कंपनियां 40 हजार रुपये से कम की नियुक्तियों में 75 फीसदी नियुक्ति स्थानीय युवाओं से करेंगे, इसी तहत सरकार ने 17 मार्च को झारनियोजन पोर्टल को लॉंच किया है,

    1932 या 1985 तय करना सरकार की जिम्मेवारी 

    सरकार का दावा है कि इस पोर्टल के जरिये स्थानीय युवाओं को झारखंड की नौकरियों में 75 फीसदी की भागीदारी सुनिश्चित हो जायेगी, पोर्टल में दर्ज कंपनियों के लिए 75 फीसदी नौकरियां स्थानीय युवाओं को देने की बाध्यता होगी. लेकिन विपक्ष अब यह सवाल उठा रहा है कि बगैर स्थानीय की परिभाषा तय किये कंपनियां किन युवाओं को रोजगार देगी. 1932 या 1985 यह तय करना तो सरकार का काम है, लेकिन सरकार को इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार ही नहीं है.


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